योगेद्र यादव ने बेशक आम आदमी पार्टी के पुराने सहयोगियों को उनकी नियति पर छोड़ने का दावा किया। लेकिन पार्टी के बाहर जाने से इनकार का ऐलान कर उन्होंने संघर्ष का मैदान भी तैयार कर लिया है।
टीम केजरीवाल की टीम योगेंद्र से भिड़ंत दिल्ली से बाहर होगी। दोनों टीमों की कोशिश आप की तरफ झुकाव रखने वाले आम लोगों को अपने साथ लामबंद करने की होगी। टीम योगेंद्र स्वराज अभियान के सहारे चलेगी। जबकि टीम केजरीवाल मिशन विस्तार के सहारे आगे बढ़ेगी।
दरअसल, गुड़गांव के स्वराज संवाद से टीम योगेंद्र को अहसास हो गया कि दिल्ली में उनके लिए ज्यादा संभावना नहीं बचती। बुधवार दिन भर चली बैठक में आगे की रणनीति पर विचार किया गया।
सीधी टक्कर के मूड में नहीं हैं योगेंद्र
टीम योगेंद्र दिल्ली में अपने विरोधियों से सीधी टक्कर नहीं लेना चाहती। प्रशांत भूषण ने भी माना कि अदालत राष्ट्रीय परिषद की बैठक को गैर कानूनी करार दे देगी। फिर भी उन्होंने कानूनी विकल्प का सहारा लेने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई।
वहीं, योगेंद्र यादव ने कहा कि हम नई शुरुआत कर रहे हैं। हमें अपना रास्ता बनाना है। दूसरों की आलोचना में अपनी ऊर्जा नहीं खत्म करनी है। सूत्र बताते हैं कि टीम योगेंद्र की रणनीति दिल्ली से बाहर जमीन तैयार करने की है।
इनकी नजर दिल्ली से बाहर के आप कार्यकर्ताओं पर है। टीम योगेंद्र का मानना है कि दिल्ली व पंजाब के अलावा दूसरे राज्यों में सांगठनिक स्तर पर आप ज्यादा मजबूत नहीं है।
हालांकि बड़ी तादाद में लोगों की रुझान पार्टी की वैकल्पिक राजनीति की विचारधारा की तरफ है। ऐसी हालत में अगर टीम योगेंद्र जोर-शोर से अपने स्वराज अभियान का प्रचार करेगी। उम्मीद जताई जा रही है कि इससे आप के आम कार्यकर्ताओं को अपने साथ लिया जा सकता है।
मिशन विस्तार के सहारे आप
पार्टी के दोनों गुटों का टकराव सार्वजनिक होने के बाद ही टीम केजरीवाल ने मिशन विस्तार को जोर-शोर से शुरू करने का ऐलान किया। इसके लिए कमेटी भी बनाई भी गई है।
साथ ही देशव्यापी अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है। वहीं, किसान आंदोलन के जरिये पार्टी आम कार्यकर्ताओं को अपने पक्ष में लामबंद करने की कोशिश कर रही है।
इस दौरान दिल्ली सरकार की तरफ से किसानों के लिए घोषित किए मोटे मुआवजे का भी प्रचार किया जा रहा है। इससे साफ है कि दोनों गुट दिल्ली से बाहर भिड़ने को तैयार हैं।