- पेवर ब्लॉक से बनेंगी सड़कें, प्री-कास्ट नालियों से सुधरेगी जल निकासी 240 दिन में काम पूरा करने का लक्ष्य
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। बरसात के मौसम में जलभराव, कीचड़ और खराब सड़कों से जूझने वाले पुराने गढ़ी मेंडू की गलियों की अब सूरत बदलने की तैयारी है। घोंडा विधानसभा क्षेत्र के इस पुराने गांव में सड़क और जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए दिल्ली सरकार के सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने 8.11 करोड़ रुपये की परियोजना की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ट्रांस यमुना एरिया डेवलपमेंट बोर्ड के तहत होने वाले इस काम में गलियों में पेवर ब्लॉक बिछाए जाएंगे और पानी की निकासी के लिए प्री-कास्ट नालियां बनाई जाएंगी। काम शुरू होने के बाद इसे 240 दिनों यानी करीब आठ महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
जलभराव और कीचड़ से मिलेगी राहत
पुराने गढ़ी मेंडू की कई गलियां लंबे समय से खराब सड़क और कमजोर जल निकासी व्यवस्था के कारण परेशानी का सबब बनी हुई हैं। बारिश के दौरान जगह-जगह पानी जमा होने से कीचड़ हो जाता है और लोगों की आवाजाही प्रभावित होती है। बच्चों को स्कूल जाने, बुजुर्गों को घर से बाहर निकलने और दोपहिया वाहन चालकों को गलियों से गुजरने में मुश्किल होती है। परियोजना में सड़क और नाली निर्माण को एक साथ शामिल किया गया है। पेवर ब्लॉक लगाने के साथ प्री-कास्ट नालियां बनाई जाएंगी, ताकि बारिश और घरों से निकलने वाले पानी की निकासी व्यवस्थित हो सके। इससे सड़क पर लंबे समय तक पानी जमा रहने की समस्या कम होने की उम्मीद है।
सड़क के साथ नाली पर भी जोर
अक्सर सड़क निर्माण के बाद जल निकासी की व्यवस्था कमजोर रहने से कुछ समय में सड़क की सतह खराब हो जाती है। पानी जमा होने से पेवर और सड़क दोनों को नुकसान पहुंचता है। इस बार दोनों कार्यों को एक ही परियोजना में शामिल किया गया है, जिससे समस्या का स्थायी समाधान करने की कोशिश है।
240 दिन में पूरा करना होगा काम
यह परियोजना ट्रांस यमुना एरिया डेवलपमेंट बोर्ड के तहत सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग कराएगा। परियोजना की अनुमानित लागत 8.11 करोड़ रुपये रखी गई है। पुरानी बसावट और घनी आबादी के बीच निर्माण के दौरान लोगों की आवाजाही बनाए रखना चुनौती होगी। ऐसे में चरणबद्ध तरीके से काम और अस्थायी रास्तों की व्यवस्था जरूरी होगी। अब स्थानीय लोगों की नजर काम शुरू होने पर है। जल निकासी की क्षमता और सड़क की गुणवत्ता ही इस परियोजना की सफलता की असली कसौटी होगी।