कोटा से लौटे एक विद्यार्थी ने बताया कि छह माह बाद मां के हाथ के पराठेे खाकर सब परेशानी भूल गए। उन्होंने कहा कि वहां टिफिन रोज आ रहा था, लेकिन अकेलेपन में घर की बहुत याद आ रही थी। मेडिकल में दाखिले की तैयारी के लिए एलेन में पढ़ाई कर रहे छात्रों के घर लौटने पर परिवार में खुशी का माहौल था तो बच्चों को देखकर, परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू भी छलक पड़े। संगम विहार में रहने वाले आकाश की मां मनोरमा देवी ने पहले ही खाना तैयार कर लिया था। उन्होंने कहा कि संक्रमण से बचाव के लिए घर में सभी एहतियात बरतेंगे, क्योंकि कोरोना को हराना है। मेडिकल की तैयारी के लिए पिछले साल ही कोटा स्थित संस्थान एलेन में पढ़ाई कर रहे रवि को टिफिन वाले ने खाना देना बंद कर दिया, लेकिन कुछ दोस्तों के साथ मिलकर किसी हॉस्टल में इकट्ठे खाना खाते रहे। बकौल रवि, घर लौटने के बाद मम्मी, पापा और बहन के चेहरे पर खुशियां देखकर मैं हर परेशानी भूल गया।
टिक टॉक बनाने से किया था मना
कोटा से दिल्ली तक के सफर के दौरान बस में स्टूडेंट्स को मास्क लगाना जरूरी था। इस दौरान उन्हें फोन से फोटो, वीडियो या टिक टॉक विडियो तैयार करने से भी मना कर दिया गया था। परिवहन विभाग के इंस्पेक्टर (इंफोर्समेंट) वेदपाल ने बताया कि भावी, इंजीनियरों और डॉक्टरो को मुश्किल वक्त में उनके अपनों तक पहुंचाने की जिम्मेवारी निभाने का मुझे सौभाग्य मिला, मैं बहुत खुश हूं। हालांकि मुझे शुगर है, फिर भी छात्र-छात्राओं को लेकर जब बस में लौट रहा था तो मुझे लगा कि मैं लॉकडाउन के इस दौर में परेशानियों का सामना कर रहे बच्चों को नके माता-पिता तक पहुंचा रहा हूं।