विवेक विहार इलाके में एक साल पहले 26 साल के शकील की मौत का राज खोलने के लिए कब्र से उसका कंकाल बाहर निकाला गया है। शकील की मौत के बाद परिजनों ने उसकी हत्या की आशंका जताकर एक साल तक उसे इंसाफ दिलाने के लिए जद्दोजहद की।
पुलिस, नेता यहां तक निचली अदालत ने उसकी अर्जी को ठुकरा दिया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद 19 अगस्त को शकील के कंकाल को कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
मामले पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
बिना पोस्टमार्टम के ही शकील के शव को दफना दिया गया था
शकील की बड़ी बहन रानी खातून (34) ने बताया कि वह परिवार के साथ गली नंबर-1, महाराजपुर, साहिबाबाद यूपी में रहती है। उसका भाई मो. शकील कृष्णा मार्केट, झिलमिल कॉलोनी इलाके में किराये के मकान में रहता था।
कुछ और लड़के भी इसके साथ रहते थे। 9 अगस्त 2014 को रानी के मोबाइल पर फोन आया कि उसके भाई की मौत हो गई है। रानी अपने पति के साथ पहुंची तो उसे मोहल्ले वालों ने बताया कि खाना खाने के बाद शकील सो गया था, सुबह वह उठ नहीं पाया।
शकील का चेहरा देखकर रानी को कुछ अजीब लगा। इधर मोहल्लेवालों और शकील के साथियों ने जल्दबाजी कर 9 अगस्त को बिना पोस्टमार्टम के ही शकील के शव को दफना दिया।
हाइकोर्ट पहुंची तो कंकाल निकालने का आया आदेश
इधर अगले दिन रानी को कुछ लोगों ने बताया कि उसके भाई की साथ में रहने वाले लड़कों ने लाठी-डंडों से पीटकर हत्या की। इसकी शिकायत लेकर पीड़िता थाने पहुंची। लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई। पीड़िता ने पुलिस मुख्यालय, स्थानीय विधायक और सांसद से भी गुहार लगाई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
थक कर उसने कड़कड़डूमा कोर्ट में इंसाफ की गुहार लगाई। उसकी अर्जी को वहां से भी खारिज कर दिया गया। बाद में रानी ने कड़कड़डूमा कोर्ट के आदेश खिलाफ हाईकोर्ट में अर्जी दी।
हाईकोर्ट ने 3 अगस्त को आदेश देते हुए शकील के कंकाल को निकलवाकर उसकी मौत के रहस्य का पता लगाने का आदेश दिया है। 19 अगस्त को कब्र से शव निकलवाकर जीटीबी अस्पताल में रखवाया गया है।