- आरजीसीआईआरसी में दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान मरीजों की सुरक्षा, भावनात्मक सहयोग, पुनर्वास और नर्सों के स्वास्थ्य पर हुई चर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजीव गांधी कैंसर संस्थान एवं अनुसंधान केंद्र आरजीसीआईआरसी की ओर से दो दिवसीय शैक्षणिक सम्मेलन नर्सिकॉन 2026 का आयोजन किया गया। सम्मेलन का विषय थ्रेड्स ऑफ होप: ऑन्कोलॉजी नर्सिंग केयर बियॉन्ड क्योर रहा। इसमें नर्सिंग पेशेवरों, डॉक्टरों, शिक्षकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने कहा कि कैंसर उपचार में नर्सों की भूमिका केवल दवा देने और इलाज में सहयोग करने तक सीमित नहीं है। वे मरीजों की सुरक्षा, भावनात्मक सहयोग, पुनर्वास और परिवारों से समन्वय में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
पहले दिन द हैप्पीनेस प्रिस्क्रिप्शन सत्र से सम्मेलन की शुरुआत हुई। इसके बाद अंतिम चरण की देखभाल, मरीजों के अधिकार, ऑपरेशन थिएटर में सुरक्षा और बच्चों में कैंसर संबंधी आपात स्थितियों पर चर्चा हुई। एक विशेष सत्र में मरीजों और उनके परिवारों ने नर्सों के प्रति आभार जताया।
हैप्पी हार्मोन्स, हेल्दी नर्सेस विषय पर पैनल चर्चा का संचालन आरजीसीआईआरसी की नर्सिंग निदेशक कर्नल मधुमिता ढाल ने किया। इसमें टाटा मेडिकल सेंटर, सफदरजंग अस्पताल, सर गंगा राम अस्पताल, मेदांता और आरजीसीआईआरसी के विशेषज्ञ शामिल हुए। चर्चा में कहा गया कि बेहतर मरीज देखभाल के लिए नर्सों का शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहना जरूरी है।
कर्नल मधुमिता ढाल ने कहा कि ऑन्कोलॉजी नर्सिंग में तकनीकी कौशल के साथ भावनात्मक मजबूती भी आवश्यक है। दूसरे दिन एब्स्ट्रैक्ट प्रेजेंटेशन, पोषण, बोन मैरो ट्रांसप्लांट, घावों की देखभाल और संक्रमण रोकथाम जैसे विषयों पर सत्र हुए।
आरजीसीआईआरसी के सीईओ डॉ. धर्मेंद्र सिंह गंगवार ने कहा कि कैंसर के पूरे उपचार सफर में नर्सें मरीजों और परिवारों के सबसे करीब रहती हैं। उनका योगदान इलाज से लेकर भावनात्मक सहयोग और पुनर्वास तक फैला है। ऐसे सम्मेलन नर्सिंग सेवाओं को और मजबूत बनाने में सहायक हैं।