उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे के शिकार लोगों ने बताया कि उनके ऊपर हमला करने वालों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए चेहरे पर हेलमेट लगा रखा था। मौजपुर से लेकर करवाल नगर तक ये उपद्रवी एक ही रंग के हेलमेट पहने हुए थे। इनके कपड़े भी एक-दूसरे से मिलते-जुलते हुए बताए गए हैं। ऐसे दंगाइयों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज के साथ-साथ फेस रिकग्निशन ऐप का सहारा भी लिया जा रहा है।
जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के पास 23 फरवरी को हिंसा की आग भड़की थी। इसकी चिंगारी पूरे उत्तर-पूर्व जिले में फैल गई थी। जाफराबाद से शुरू हुआ उपद्रव मौजपुर, यमुना विहार, भजनपुरा, करावल नगर सहित कई अन्य इलाकों में फैल गया।
जाफराबाद के पीली मिट्टी इलाके में रहने वाले शकील खान ने बताया कि हिंसा फैलाने वाले चेहरों को कपड़ों से बांधे हुए थे। इसके अलावा, कुछ उपद्रवी हेलमेट पहने हुए थे, जो एक समुदाय की दुुकानों को निशाना बनाकर उन्हें आग के हवाले कर रहे थे।
हिंसा के शिकार हुए आतीफ बताते हैैं कि हेलमेट लगाए उपद्रवियों के हाथों में तलवार से लेकर कई दूसरे हथियार भी थे। उपद्रवियों का एक गुट 50 से अधिक संख्या का था, जो हर तरफ आगजनी कर रहा था। इन उपद्रवियों की मदद कुछ स्थानीय लोग भी कर रहे थे।
पीड़ितों की मांग है कि निष्पक्षता से पूरे प्रकरण की जांच की जाए तो हिंसा के कई मास्टरमाइंड भी पकड़े जाएंगे। वहीं पुलिस का कहना है कि पूरे प्रकरण की जांच एसआईटी कर रही है। जांच से जुड़े सभी साक्ष्यों को एकत्र किया जा रहा है। इसके बाद हेलमेट में चेहरा छुपाए और दूसरे दोषी भी पकड़े जाएंगे।