बैंक से 10 करोड़ रुपये के कर्ज में फर्जीवाड़ा करने वाले सनी कालरा को सीबीआई शनिवार को मस्कट से भारत लाने में सफल रही। सीबीआई की अर्जी पर इंटरपोल ने 2016 में सनी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था जिसके आधार पर जांच एजेंसी को उसका प्रत्यर्पण कराने में सफलता मिली।
सीबीआई का आरोप है कि व्हाइट टाइगर स्टील्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सनी कालरा ने पंजाब नेशनल बैंक से लिया 10 करोड़ का कर्ज नहीं लौटाया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि कालरा ने गुपचुप तरीके से अपनी कंपनी का सारा सामान ठिकाने लगा दिया था ताकि बैंक कर्ज का बकाया वसूल न कर पाएं।
सीबीआई ने कालरा, उसकी पत्नी और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी का यह मामला 22 दिसंबर 2016 को अपने हाथ में लिया था। एफआईआर दर्ज होने के बाद से कालरा और उसकी पत्नी फरार थे। इस मामले में कालरा और उसकी पत्नी के अलावा तीन पीएनबी के अधिकारी भी आरोपी हैं। इनमें तत्कालीन मुख्य प्रबंधक, प्रबंधक और एजीएम शामिल थे।
इंटरपोल ने सीबीआई की मांग पर 31 मई 2016 में सनी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था। जिसके बाद पता चला कि वह मस्कट में छिपा है जहां स्थानीय एजेंसियों ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद सीबीआई लगातार मस्कट की एजेंसियों के संपर्क में थी और प्रत्यर्पण प्रक्रिया को पूरा करने के बाद उसे शनिवार को भारत लाया गया। सीबीआई अब सनी कालरा को कोर्ट के समक्ष पेश करेगी।