आम आदमी के लिए ही नहीं, गाजियाबाद की सड़कें पुलिसकर्मियों के भी खून की प्यासी हैं। पिछले कुछ सालों में 15 से ज्यादा पुलिसवालों की मौत सड़क हादसों हो चुकी है।
शुक्रवार को सुरेश बालियान को कुचलने वाले का तो पुलिस पता भी नहीं कर पाई, जबकि नजदीक ही कलक्ट्रेट और पुलिस आफिस है। हापुड़ चुंगी भी पर भी फोर्स रहती है।
इससे पहले वर्ष 2004 में कांस्टेबल महेंद्र सिंह की अज्ञात वाहन की चपेट में आकर मौत हो गई थी, सिपाही यशपाल सिंह कार की टक्कर लगने से मौत की नींद सो गए थे।
पुलिसकर्मी धर्मपाल सिंह अज्ञात वाहन की चपेट में आकर, राकेश कुमार मित्तल मोटरसाइकिल की टक्कर से, टीकम सिंह भी सड़क दुर्घटना की ही भेंट चढ़े।
पिछले साल वर्ष 2005 में मार्च के महीने में ट्रैक्टर-ट्राली की टक्कर से सिपाही जयप्रकाश सिंह की मौत हो गई थी।
अप्रैल महीने में सुनील कुमार, जून के महीने में यज्ञनारायण दीक्षित, सिपाही राजवीर सिंह, उपेंद्र सिंह और खानचंद की भी पिछले ही साल सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी।
जबकि कांस्टेबल स्नोद कुमार की बिजली का तार टूटकर गिर जाने से मौत हो गई थी। पिछले पौने तीन सालों में जिले में 13 पुलिसकर्मियों की मौत हुई है।
इस साल भी पुलिसकर्मी सावंती सिंह की टैंपू की टक्कर लगने और मुरादनगर में तैनात सिपाही प्रेमपाल सिंह की ट्रक की टक्कर लगने से मौत हो चुकी है। जबकि इस दौरान एक दर्जन से ज्यादा पुलिसवाले सड़क दुर्घटनाओं में जख्मी भी हुए हैं।