एम्स के पूर्व सीवीओ संजीव चतुर्वेदी को कैट से बड़ी राहत मिली है। कैट ने दो माह के अंदर कैडर ट्रांसफर पर निर्णय लेने के आदेश दिए हैं। संजीव ने हरियाणा से उत्तराखंड ट्रांसफर के लिए अर्जी दी थी जिसे दोनों राज्यों और वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति मिल गई थी।
एसीसी को इस पर अंतिम निर्णय लेना था, लेकिन कहा गया कि दोनों राज्यों से दोबारा एनओसी लेकर आएं क्योंकि राज्य में सरकार बदल गई है। इसके बाद संजीव की ओर से कैट में अपील की गई थी।
सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) के चेयरमैन सैयद रफत आलम और सदस्य डॉ. बी.के.सिन्हा ने आदेश में कहा है कि अधिकारी को परेशान नहीं किया जाए और दो माह के अंदर कैडर ट्रांसफर पर फैसला लें।
कैट ने बदल दिया एसीसी का फैसला
इसके साथ ही पंचाट ने प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली एसीसी के 28 जनवरी 2015 के आदेश को रद्द कर दिया। संजीव की ईमानदारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ किए गए कार्यों की वजह से ही केंद्रीय सतर्कता आयोग ने जुलाई-2011 में उन्हें सुरक्षा देने के लिए कहा था।
कैट ने उम्मीद जताई कि ऐसी स्थिति दोबारा कभी नहीं आएगी, जहां ईमानादरी को सजा दी जाएगी और भ्रष्टाचार को पुरस्कृत किया जाएगा। ऐसी व्यवस्था ज्यादा समय तक नहीं चलती।
कैट ने अपने आदेश में कवि गुरु रवींद्रनाथ टैगोर के काव्य संग्रह गीतांजलि का जिक्र करते हुए लिखा, ‘जहां मन बिना किसी भय के हो, जहां मस्तक ऊंचा उठा हो, जहां ज्ञान मुक्त हो, जहां पर संसार संकीर्ण दायरों में न बंटा हो.....हे परमपिता मेरा देश स्वतंत्रता के उस स्वर्ग में जागृत हो।’
फैसले से संजीव की स्थिति मजबूत
14 अगस्त 2014 को संजीव को एम्स के सीवीओ के पद से हटाया गया उसके बाद से वे लगातार किसी न किसी कारण सरकार के निशाने पर हैं। लेकिन कहीं से भी उनकी ईमानदारी पर सवाल खड़े नहीं किए गए।
बार-बार उन्हें सीनियर की ओर से ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ बताया गया और 10 में से साढ़े नौ अंक तक दिए गए। हरियाणा में काम करने के दौरान उन पर कई तरह के आरोप लगे, लेकिन चार बार राष्ट्रपति ने उन्हें सभी आरोपों से मुक्त किया और उनकी तारीफ की।
एक बार फिर कैट द्वारा उनकी ईमानदारी का बखान करने से उन्हें नैतिक रूप से काफी बल मिलेगा।