सेना के रिटायर ब्रिगेडियर को आय से अधिक संपत्ति मामले में विशेष सीबीआई अदालत ने दो साल कैद सहित पांच लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। दोषी की संपत्ति घोषित आय से करीब 68 लाख रुपये अधिक पाई गई थी।
ब्रिगेडियर नई दिल्ली स्थित रक्षा मंत्रालय में आयुध सेवा के उप महानिदेशक पद पर तैनात रह चुके हैं। साकेत जिला अदालत के विशेष सीबीआई जज दिनेश कुमार शर्मा ने पुणे निवासी रिटायर ब्रिगेडियर समीर बरोन राय को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की कई धाराओं में दोषी ठहराते हुए शनिवार को यह सजा सुनाई है।
वहीं, अदालत ने फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए 25 हजार रुपये के निजी मुचलके व एक जमानती की शर्त पर 1 अक्तूबर तक जमानत प्रदान कर दी है। पेश मामले के मुताबिक, सीबीआई ने तत्कालीन आयुध सेवा उप महानिदेशक ब्रिगेडियर राय के खिलाफ 31 अगस्त, 08 को मुकदमा दर्ज किया था।
जांच एजेंसी का आरोप था कि राय ने 1 अप्रैल 2000 से 31 अगस्त, 08 के बीच अपने व परिजनों के नाम पर लाखों रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की थी। राय 1973 में भारतीय सेना अकादमी देहरादून में भर्ती हुए।
वहां से पास होने के बाद कमीशन प्राप्त किया और 2005 में ब्रिगेडियर बने। वे सेना से 31 अगस्त, 08 को रिटायर हो गए थे। राय ने 1999 के कारगिल युद्ध में भी हिस्सा लिया था।
पूर्व लेफ्टिनेंट ने निचली अदालत के फैसले को दी चुनौती
हाईकोर्ट ने टैट्रा ट्रक रिश्वत मामले में पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल तेजेंद्र सिंह की जमानत अर्जी पर सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। आरोपी ने निचली अदालत द्वारा उन्हें जेल भेजने के फैसले को चुनौती दी है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी के समक्ष जमानत को लेकर सुनवाई के दौरान पता चला कि संबंधित फाइल अभी तक अदालत में नहीं पहुंची है। बचाव पक्ष ने सुनवाई के लिए आग्रह किया, लेकिन अदालत ने बिना फाइल सुनवाई से इनकार कर दिया।
करीब 3.30 बजे फाइल आने के बाद बचाव पक्ष ने तर्क रखा कि संबंधित अदालत ने बिना आधार के जमानत खारिज कर उनके मुवक्किल को जेल भेज दिया। जबकि जांच के दौरान सीबीआई ने कभी उनको गिरफ्तार नहीं किया था।
बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता गीता लूथरा, दयान कृष्णन व प्रमोद कुमार दुबे ने कहा कि संबंधित अदालत ने हाल ही में कोल ब्लाक मामले में आरोपी व अन्य कई मामलों में इस आधार पर जमानत दे चुकी है कि जांच के दौरान उनको गिरफ्तार नहीं किया गया। उनके मामले में फैसला अलग क्यों।
इसके अलावा उनके मुवक्किल ने वीके सिंह के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल को फर्जी मामले में फंसाया गया है। अदालत ने सीबीआई को नोटिस जारी कर 4 सितंबर को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सीबीआई का आरोप है कि तेजेंद्र सिंह ने तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह को ट्रक खरीदने को स्वीकृति देने के लिए 14 करोड़ रुपये रिश्वत की पेशकश की थी। अदालत ने पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी, जनरल वीके सिंह और अन्य गवाहों के बयानों के मद्देनजर तेजेंद्र सिंह को समन जारी किया था।