नई दिल्ली। बीकानेर हाउस के सीसीए भवन में कलाकार विपुल कुमार की नई कृतियों की प्रदर्शनी तप और तपिश लगी है। इसमें मिट्टी, अभ्यास और भट्ठी की गर्मी से गुजरती रचनात्मक प्रक्रिया को सामने रखा गया है। प्रदर्शनी रेशमा चोरडिया की आर्ट एक्सप्लोर की ओर से प्रस्तुत और कला समीक्षक अनीता दुबे की क्यूरेट की गई है।
कृतियों की सतह, आकार और बनावट पर ध्यान जाता है। मिट्टी की प्राकृतिक उपस्थिति के साथ कलाकार ने अमूर्त और पहचाने जा सकने वाले रूपों को साधा है। इनमें प्रकृति, सांस्कृतिक स्मृतियों और पौराणिक संदर्भों की झलक मिलती है। कुमार राजस्थान के भैंसलाना गांव में स्टूडियो में काम करते हैं। पत्थर तराशने से शुरू हुई उनकी यात्रा बाद में सिरेमिक कला की ओर बढ़ी।
विपुल कुमार कहते हैं कि तप कलाकार के निरंतर अभ्यास और अनुशासन को दर्शाता है, जबकि तपिश भट्ठी की वह गर्मी है, जो मिट्टी का रूप बदल देती है। क्यूरेटर अनीता दुबे ने कृतियों को गीली मिट्टी की नाजुकता को हड्डी जैसी मजबूती में बदलने की प्रक्रिया बताया। संवाद