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आईएएस-पीसीएस अफसरों ने किया ‘करोड़ों का खेल’

Wed, 23 Jul 2014 11:43 PM IST
संजय शिशौदिया/अमर उजाला, गाजियाबाद
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प्राइमरी स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले दोपहर के भोजन (मिड-डे मील) को भी अफसरों और ठेकेदारों ने नहीं छोड़ा। मिड-डे मील का ठेका दिए जाने के नाम पर ही अफसरों और ठेकेदारों ने करोड़ों की बंदरबांट कर ली।
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सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में इस बात को स्पष्ट किया है कि मिड-डे मील के नाम पर करीब साढे़ 6 करोड़ का घोटाला किया गया है। मैनपुरी में तैनात आईएएस और पीसीएस अफसर भी इस घोटाले में संलिप्त रहे।

3 जून 2007 से लेकर 1 जुलाई 2008 के बीच मैनपुरी जिले में मिड-डे मील के नाम पर यह घोटाला हुआ। गाजियाबाद की सर्च नामक एनजीओ को इसका ठेका दिया गया था।

सीबीआई चार्जशीट के अनुसार इस मामले में 24 अप्रैल 2011 को मैनपुरी की कोतवाली में सप्लाई इंस्पेक्टर संजय मिश्रा की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। 2 अगस्त 2011 को हाईकोर्ट के आदेश पर मामला सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया था।
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सीबीआई ने मैनपुरी के तत्कालीन दो डीएम दिनेश चंद शुक्ला, सच्चिदानंद दुबे, दो सीडीओ हृदय शंकर चतुर्वेदी, जेबी सिंह और दो बीएसए रघुबीर सिंह और कृष्णदेव नारायण के अलावा शिक्षा विभाग के सीनियर क्लर्क प्रशांत मिश्रा, सर्च एनजीओ के सचिव विवेक सुदर्शन, संयुक्त सचिव अशोक चौहान और विष्णु दयाल राजपूत के अलावा सर्च एनजीओ को भी नामजद किया था।

वर्तमान में जेबी सिंह, रघुबीर सिंह, विष्णु दयाल राजपूत, प्रशांत मिश्रा, विवेक सुदर्शन, अशोक चौहान और सच्चिदानंद दुबे जेल में हैं। जबकि हृदय शंकर चतुर्वेदी और कृष्ण देव नारायण के खिलाफ कोर्ट ने गैर जमानती वारंट और 82 की कार्रवाई कर रखी है। आईएएस दिनेशचंद शुक्ला को हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है।
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