आवास विकास परिषद की योजनाओं को खरीदार न मिलने के हालत से पूरे शहर का रीयल एस्टेट सेक्टर जूझ रहा है। 2012 के अंत से 2014 के अंत तक प्रापर्टीज की बिक्री में 50 फीसदी तक की गिरावट आ गई है।
बीते दो माह में ही खाली पड़ी संपत्तियों का आंकड़ा 20 फीसदी और बढ़ गया है। इसके चलते शहर में कई नए प्रोजेक्ट्स की शुरुआत में ब्रेक लग गया है। हालात यह हैं कि जीडीए की सस्ती आवासीय योजनाओं को छोड़ दें, तो अन्य योजनाओं को खरीदार नहीं मिल रहे हैं।
योजनाओं में आवेदन की डेट कई-कई बार बढ़ानी पड़ रही है। नीलामी के जरिए संपत्तियों की बिक्री बढ़ाने के लिए जीडीए ने बीते दिनों कई शर्तों में छूट दी है।
बीते डेढ़ साल से मंदी की मार से परेशान शहर का रीयल एस्टेट सेक्टर अब तक इससे नहीं उबर पाया है। हालात यह हैं कि शहर के हाउसिंग प्रोजेक्ट में खाली फ्लैट्स की संख्या बढ़ती ही जा रही है।
दो माह पहले जहां 30 फीसदी फ्लैट्स खाली थे, वहीं अब यह करीब 50 फीसदी तक खाली हैं। बिल्डरों नए प्रोजेक्टस शुरू करने से फिलहाल किनारा कर लिया है। करीब 200 हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में से 100 से अधिक में करीब 40 फीसदी फ्लैट्स खाली पड़े हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर शहर नोएडा-दिल्ली से काफी पीछे है। फ्लैट्स की कीमतें तो आसमान छू रहीं हैं, लेकिन सुविधाएं नदारत हैं। ऐसे में गाजियाबाद में 70-80 लाख रुपये के फ्लैट की तुलना में लोग नोएडा-दिल्ली में 10-20 लाख रुपये और देकर प्रापर्टी खरीदना बेहतर सौदा मान रहे हैं।
कहां कितने फ्लैट्स बने (अनुमानित)
एनएच-58 के आसपास 15-20 हजार
एनएच-24 के आसपास 7-10 हजार
वैशाली, इंदिरापुरम 15-20 हजार
साहिबाबाद 6-12 हजार
वसुंधरा 2 से 5 हजार
अन्य जगह 10-20 हजार
खाली पड़े फ्लैट्स की संख्या (अनुमानित)
एनएच-58 के आसपास 6 से 7 हजार
एनएच-24 के आसपास 2500 से 3 हजार
वैशाली, इंदिरापुरम 4500 से 5 हजार
साहिबाबाद 2500 से 3 हजार
वसुंधरा एक हजार 800 से 1200
अन्य जगह 6 से 7 हजार
अटक रहे प्रोजेक्ट्स
एनएच-58: 15-20 प्रोजेक्ट्स के करीब 8000 फ्लैट्स
एनएच-24: 10 से 15 प्रोजेक्ट्स के करीब 5 से 7 हजार फ्लैट्स
वैशाली-इंदिरापुरम: 15 से 20 प्रोजेक्ट्स में 2 से 4 हजार फ्लैट्स
रीयल एस्टेट की बदहाली के कारण
- होम लोन के ब्याज दरों की बढ़ी दरें
- जमीन और निर्माण की बढ़ी लागत
- सर्किल रेट बढ़ने से कंपाउंडिंग और स्टांप फीस में इजाफा, महंगे हुए फ्लैट्स
- ऊंची कीमतों के कारण निवेशकों की दूरी
- प्रापर्टी में निवेश से अच्छा रिटर्न न मिलना
- डीडीए, जीडीए की सस्ती आवासीय योजनाएं
- सेक्टर में सुधार के लिए अपर्याप्त सरकारी सहायता
इससे मिल सकती है राहत
- होम लोन की ब्याज दरें हों कम
- बिल्डर प्रोजेक्ट्स को समय पर मिले क्लीयरेंस
- सरकारी सहायता से कम हों कीमतें
एक्सपर्ट की राय
बीते दो वर्षों की तुलना में पिछले माह तक प्रापर्टी की सेल में 50 फीसदी तक की गिरावट थी। होम लोन की वर्तमान दरें 10.50 फीसदी से ऊपर चल रहीं हैं। इनमें कमी होने पर रीयल एस्टेट का मार्केट तेजी से बूम करेगा। हालांकि यही समय प्रापर्टी खरीद के लिए भी बेहतर है। मार्केट धीरे-धीरे सुधर रही है, इससे बेहतर रिटर्न मिलेगा। - गौरव गुप्ता, सचिव, आरएनई बिल्डर्स एसोसिएशन
जल्द घटेंगी होम लोन की ब्याज दरें
2013 में राजनीतिक अस्थिरता के चलते सेक्टर में मंदी का दौर था। इस दौरान शुरू हुए प्रोजेक्ट्स तो बनते रहे, लेकिन निवेशक दूर रहे। इस कारण खाली फ्लैट्स की संख्या बढ़ गई। अब सुधार दिख रहा है। क्रेडाई ने केंद्र सरकार से होम लोन की ब्याज दरें घटाने की मांग की है। इस साल के अंत तक 10 फीसदी से कम और नए वित्तीय वर्ष में ब्याज दरें 8 फीसदी से कम हो सकती हैं। - मनोज गौड़, क्रेडाई अध्यक्ष, वेस्ट यूपी