फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘दोषी नेताओं के चुनाव लड़ने पर हो आजीवन प्रतिबंध’

Sat, 04 Jun 2016 02:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
आपराधिक मामले में दोषी ठहराए गए राजनेता या व्यक्ति के चुनाव लड़ने पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है।अभी तक यह अवधि मात्र छह वर्ष है। इतना ही नहीं याचिका में चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवारों की न्यूनतम शैक्षिक योग्यता और अधिकतम आयु सीमा भी निर्धारित करने के लिए दिशा निर्देश तय करने की मांग की गई है।
विज्ञापन


मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी व न्यायमूर्ति वीकेशाली की खंडपीठ के समक्ष अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर याचिका में जनप्रतिनिधित्व कानून के कुछ प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित करके रद्द करने की मांग की गई है।

खंडपीठ ने याची से कुछ मुददों पर स्पष्टीकरण मांगते हुए मामले की सुनवाई 24 अगस्त तय की है। याचिका में जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 8 व धारा 9 को रद्द करने की मांग की गई है।
विज्ञापन


इसी धारा में अपराधिक मामलों में सजा पाने वाले नेताओं पर मात्र छह वर्ष के प्रतिबंध का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि यह धाराएं भारतीय संविधान में आम लोगों को दिए मौलिक अधिकार का उल्लंघन करती है।

याचिका में तर्क दिया गया है कि कार्यपालिका और न्यायपालिका में जब भी किसी को भी अपराध के लिए दोषी ठहराया जाता है तो उसकी सेवाओं को जीवन भर के लिए समाप्त कर दिया जाता है।

लेकिन विधायिका के मामले में अलग ढंग से नियम बनाया गया है जो गलत है। इस नियम में छह वर्ष के बाद वे फिर से विधानमंडल के सदस्य बन जाते हैं। सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने याची के समक्ष सवाल उठाया कि इसी प्रकार की याचिका मद्रास हाईकोर्ट के समक्ष लंबित है।

ऐसे में वहीं यह मुद्दा तय होने दें। याची ने कहा कि उनकी याचिका में कई मुद्दे अलग हैं। अदालत ने उन्हें मद्रास हाईकोर्ट में विचाराधीन याचिका की प्रति पेश करने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें