तमाम विरोधों को दरकिनार करते हुए नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण से 500 करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश अवस्थापना विकास कोष (यूपीआईडीएफ) में जमा कराने का निर्णय लिया गया है। 100 करोड़ रुपये की पहली किस्त 14 नवंबर को कोष में जमा भी की जा चुकी है। यह सारा काम प्राधिकरण ने गोपनीय तरीके से पूरा कर लिया और बोर्ड बैठक में लिए गए फैसले की किसी को भनक तक नहीं लगी।
4 फरवरी को नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में इस पर मोहर लग चुकी है। इसके हिसाब से अवस्थापना विकास कोष में नोएडा प्राधिकरण 350 करोड़ रुपये देगा, जबकि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण 100 करोड़ और यमुना प्राधिकरण 50 करोड़ रुपये जमा करेंगे। पहली किस्त के रूप में 100 करोड़ रुपये भारतीय स्टेट बैंक की सचिवालय शाखा (लखनऊ) में जमा कर दिए हैं। दरअसल, प्रदेश में विकास कार्यों के लिए सरकार ने उत्तर प्रदेश अवस्थापना विकास कोष का गठन किया है।
इस पैसे को इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च कराने का इरादा है। इसके लिए फंड एकत्रित किया जा रहा है। चूंकि नोएडा प्राधिकरण प्रदेश का सबसे धनी प्राधिकरण है। 10 हजार करोड़ रुपये के आसपास इसका सालाना बजट होता है। ग्रेटर नोएडा और यमुना भी तेजी से उभर रहे हैं। इस लिहाज से शासन की नजर इन प्राधिकरणों पर है।
सरकार के आगे प्राधिकरण मजबूर
फंड जमा कराने पर चर्चा एक साल से भी अधिक समय से शुरू हो गई थी। उस समय यहां के सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने जोरदार विरोध किया था। नोएडा का पैसा नोएडा में ही लगाने की मांग उठी। विरोध को शांत करने के लिए प्राधिकरण ने पैसा न देने की बात कही, मगर बोर्ड से अनुमति और पहली किस्त जारी होने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि 500 करोड़ रुपये विकास फंड में जमा किए जाएंगे।
2 अप्रैल 2013 को प्राधिकरण की तरफ से लखनऊ में एक कार्यक्रम हुआ था, जिसमें मुख्यमंत्री ने यहां की करीब 18 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं को हरी झंडी दिखाई थी। मंच से ही कहा गया था कि इतने धनवान प्राधिकरण की मदद से अन्य क्षेत्रों में विकास किया जा सकता है। हालांकि, उस वक्त नोएडा के लोगों ने चेतावनी दी थी कि किसी भी कीमत पर यहां के पैसे को बाहर नहीं जाने दिया जाएगा, क्योंकि पैसा किसानों की जमीन से कमाया गया है।
प्रदेश सरकार को लगता है कि यहां के प्राधिकरण के पास काफी पैसा है लेकिन हकीकत एकदम उलट है। नोएडा प्राधिकरण के पैसे से ही ग्रेनो और यमुना प्राधिकरण के विकास कार्य कराए जा रहे हैं। ग्रेनो प्राधिकरण पर करीब छह हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। किसानों को 64 फीसदी अतिरिक्त पैसे का इंतजाम करने के लिए अपनी जमीन गिरवी रखनी पड़ रही है। नोएडा प्राधिकरण अगर पैसा न दे तो कर्मचारियों की तनख्वाह तक न मिले। रही बात यमुना प्राधिकरण की तो उसकी शुरुआत ही कर्ज से हुई थी, ब्याज के रूप में हर दिन करीब 1 करोड़ रुपये का भुगतान करना होता है।
दो फीसदी अतिरिक्त स्टांप शुल्क वसूलने की तैयारी
प्राधिकरणों की तरफ से पहली किस्त तो जारी कर दी गई है, मगर बाकी आवंटियों से वसूलने की भी तैयारी है। प्राधिकरण ने शासन को प्रस्ताव भेजा है, जिसमें कहा गया कि 2008 के शासनादेश के अनुसार, विकास प्राधिकरणों के क्षेत्र में आवंटित संपत्तियों की रजिस्ट्री से मिलने वाले स्टांप शुल्क का दो प्रतिशत हिस्सा प्राधिकरणों के खाते में जमा होगा, मगर उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास क्षेत्र अधिनियम 1976 में प्रावधान न होने के कारण नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण को यह लाभ नहीं मिल रहा।
इसलिए इस अधिनियम में संशोधन करते हुए दो फीसदी अतिरिक्त स्टांप शुल्क वसूल किया जाए। इससे मिलने वाली धनराशि को तीनों प्राधिकरणों की तरफ से अवस्थापना कोष में जमा कराया जाए। इससे करीब 25 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है।
शासन में इस मसले पर विचार हो रहा है। अगर फैसला हुआ तो नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में पांच केबजाय सात फीसदी स्टांप शुल्क देकर संपत्ति की रजिस्ट्री करानी पड़ेगी। गाजियाबाद प्राधिकरण दो फीसदी स्टांप शुल्क पहले से वसूल रहा है। वहां रजिस्ट्री के समय सात प्रतिशत स्टांप शुल्क देना पड़ता है।