इमेनुअल सेवा ग्रुप संस्था में छापा मारकर छुड़ाए गए बच्चों ने एक बड़ा खुलासा किया है। बच्चों का कहना है कि रात के समय नाबालिग लड़कियों को बंधक बनाकर बाहर ले जाया जाता था।
वहीं, बच्चों को मांस खाने और बाईबिल की प्रार्थना करने के लिए दबाव डाला जाता था। शनिवार को अमर उजाला टीम ने इन छुड़ाए गए बच्चों से बात की जिसमें इस संस्था पर धर्म परिवर्तन के अलावा मानव तस्करी जैसे सनसनीखेज आरोप लगाए गए हैं।
दरअसल, एक जनवरी को चाइल्ड लाइन संस्था द्वारा इस संस्था के नोएडा, देहरादून और सहारनपुर के केंद्रों पर पर छापा मारकर बच्चों का छुड़ाया गया था।
मना करने पर करते थे पिटाई
मूलरूप से मध्यप्रदेश के छतरपुर में रहने वाले धीरज 12 वर्ष (बदला हुआ नाम) और उसकी मां को वर्ष 2011 में काम के सिलसिले में उन्हें देहरादून ले जाया गया था।
देहरादून में उसकी मां को बाइबिल बांटकर ईसाई धर्म का प्रचार करने के लिए कहा जाता था। वहीं, बच्चे को आईएएस बनाने का सपना दिखाकर उसे शेल्टर होम में रखा गया था। जहां बच्चों को ईसाई तौर तरीके प्रार्थना, गीत सिखाए जाते थे।
उन्हें जबरन मांस खाने के लिए भी बोला जाता था। यहीं साथ में नौ साल के एक अन्य बच्चे राहुल (बदला हुआ नाम) ने बताया कि उन्हें बताया जाता था कि वह केवल ईसाई धर्म के बारे में बात करें और उन्हें अपने धर्मों की पूजा करने नहीं दी जाती थी।
बच्चों द्वारा प्रार्थना करने मना करने पर उनकी पिटाई भी की जाती थी। यहां परिजनों से मिलने के लिए भी मनाही होती थी, जिससे बच्चे कभी उनसे सच्चाई न उगल सकें।
मानव तस्करी का भी मामला
बच्चों ने अमर उजाला को बताया कि संस्था के लोग नाबालिग लड़कियों को रात के समय जबरन बाहर ले जाते थे। वहीं, देहरादून वाले शेल्टर होम में एक नाबालिग लड़की के साथ शेल्टर होम की देखरेख करने वाले ने छेड़छाड़ भी की थी। बच्चों के माता-पिता को जानकारी मिलने पर जब इसका विरोध किया गया तो उस नाबालिग लड़की को गायब कर दिया गया।
तीन लाख जमा करो और बच्चे को ले जाओ
तीन वर्ष से वहां बंद एक बच्चे की मां ने बताया एक लड़की के साथ छेड़छाड़ की जानकारी मिलने पर देहरादून के शेल्टर होम में बच्चों के माता-पिता ने जब इसका विरोध जताया तो उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया।
वहीं, जब अपने बच्चों को वापस देने की बात की गई तो संस्था के कर्मियों ने उससे तीन लाख रुपये देने पर ही बच्चा देने को कहा।
कई वेबसाइटों और विदेशों के जरिए चंदा इकट्ठा करती थी संस्था
अनाधिकृत रूप से चल रही संस्था ने वेबसाइट बना रखी थी। संस्था वेबसाइट के जरिए चंदा इकट्ठा करने का कार्य भी करते थी। बताया जा रहा है कि संस्था को विदेशों से भी भारी मदद मिल रही थी।