ईएसआई अस्पताल में एक 40 वर्षीय महिला में प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम (मलेरिया पैरासाइट) की पुष्टि हुई है। ये जिले में पहला ऐसा केस है। हालांकि अभी तक स्वास्थ्य विभाग के पास इस मरीज की जानकारी नहीं हैै। ये मलेरिया के अन्य पैरासाइट की तुलना में खतरनाक होता है। अगर समय पर इसका इलाज न कराया जाए तो गुर्दा, दिमाग के अलावा शरीर के अन्य हिस्सों पर प्रभाव डाल सकता है।
पिछले एक महीने से अस्पताल में मलेरिया के केस आने शुरू हो गए थे। अब ईएसआई अस्पताल में पहला प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम का केस आया है। हालांकि ये मरीज अब ठीक हो चुका है। जेपी अस्पताल के सीनियर डॉक्टर अनिल रंजन ने बताया कि ये मलेरिया के अन्य पैरासाइट की तुलना में खतरनाक होता है। अगर समय पर इलाज न कराया जाए तो पीड़ित की मौत तक हो सकती है।
ईएसआई अस्पताल की निदेशिका डॉ. नीलिमा ने बताया कि प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम का मामला सामने आया है। डॉक्टर से इसकी पूरी जानकारी ली जा रही है। एडिशनल एसीएमओ डॉ. भारत भूषण ने बताया कि ईएसआई अस्पताल की मलेरिया की रिपोर्टिंग हम लोगों के पास नहीं आती है। इसलिए इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है। स्वास्थ्य विभाग अस्पताल से मलेरिया की रिपोर्ट मंगाएगा।
डेंगू की दस्तक के बाद भी गाइड लाइन नहीं की जारी
जिले में डेंगू ने दस्तक दे दी है। स्वास्थ्य विभाग ने भी एक 2 साल की बच्ची में डेंगू की पुष्टि की है। लेकिन अभी तक स्वास्थ्य विभाग ने गाइड लाइन जारी नहीं की है। इस बारे में विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिछले वर्ष गाइड लाइन जारी की थी, इस बार भी वही मानी जाएगी।
ईएसआई अस्पताल में नहीं बना डेंगू वार्ड
जिला अस्पताल में तो डेंगू का वार्ड बना दिया गया है। लेकिन अभी तक ईएसआई अस्पताल में डेंगू का वार्ड नहीं बनाया गया है।