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प्रदूषण से गर्भस्थ शिशु हो सकते हैं मानसिक विकलांग

Wed, 18 Mar 2015 08:31 PM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
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प्रदूषण से गर्भवती महिलाओं को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार प्रदूषण में रहने से प्रसव में समस्या आने के साथ ही बच्चा अल्प विकसित हो सकता है।
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इसके चलते पांच फीसदी तक बच्चे मानसिक रूप से कमजोर हो सकते हैं। विशेषज्ञों ने एनसीआर में प्रदूषण मानकों को देखते हुए गर्भवती महिलाओं की अतिरिक्त देखभाल पर जोर दिया है।

दिल्ली और एनसीआर में प्रदूषण बेकाबू होता जा रहा है। दिल्ली का प्रदूषण जहां मानकों से चार गुना मिला है, वहीं गाजियाबाद में प्रदूषण लगातार तीसरे साल प्रदेश में सबसे ज्यादा मिला है। यहां के प्रदूषण में सबसे ज्यादा एसपीएम, एसओ-2 और सीओ-2 हैं।
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इसके अलावा हवा में लैड की मात्रा भी पाई जा रही है। इससे एनसीआर की हवा सांस लेने लायक नहीं रह गई है। इसका नुकसान सभी को होता है, लेकिन गर्भवती महिलाओं और गर्भस्थ शिशुओं को ज्यादा नुकसान पहुंचता है।
यह है स्थिति
पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के रीजनल आफिसर पार्श्वनाथ सिंह के अनुसार एसपीएम का मानक 50 क्यूब घन मीटर ईकाई के सापेक्ष 350 तक पहुंच गया है। एसओ-2 और सीओ-2 का हाल भी ऐसा ही है। सीओ-2 अपने निर्धानित मानक 80 क्यूब घन मीटर केसापेक्ष 220 और एसओ-2 की मात्रा मानक 80 के सापेक्ष 180 है।

यह होती है बीमारी
वरिष्ठ फिजिशियन डा. जीवी सिंह के अनुसार एसपीएम के चलते फेफड़ों और सांस की नली का कैंसर-टीबी हो जाता है। कार्बन डाई आक्साइड के चलते हाई बीपी, किडनी फेल्योर, हार्ट फेल्योर और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। सल्फर डाई आक्साइड से ब्रेन कैंसर, ब्रेन ट्यूमर, ब्लड कैंसर आदि होने की आशंका बढ़ जाती है।

गर्भस्थ शिशु को होती है परेशानी
गाईनो डा. मंजू गुप्ता के अनुसार प्रदूषण में गर्भवती केलगातार रहने से गर्भस्थ शिशु को निर्धारित मात्रा में ब्लड सप्लाई नहीं मिलती है। इसका असर उसके शारीरिक-मानसिक विकास पर पड़ता है। प्रदूषण के खतरे के चलते दिल्ली-एनसीआर में पांच फीसदी बच्चों का विकास प्रभावित होने का खतरा है।

यह हो सकता है बचाव
गर्भवती महिलाओं को ज्यादा प्रदूषण वाले क्षेत्रों में ज्यादा समय न रखें। उनके स्वास्थ्य की नियमित जांच कराते रहें और खानपान की पौष्टिकता पर ज्यादा ध्यान दें। गर्भस्थ शिशु के विकास की नियमित जांच कराते रहें।
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