दिल्ली में यूपी के प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों बहन जी और नेताजी की राह केजरीवाल रोककर बैठ गए हैं। समाजवादी पार्टी ने दिल्ली में कोई खास प्रदर्शन अभी तक नहीं किया है लेकिन बसपा ने यहां 2008 तक तीसरी बड़ी पार्टी के रूप में जगह बनाए रखी और दिल्ली के अपने परंपरागत वोट बैंक (एससी-एसटी वोटर) पर उसका सिक्का चलने लगा।
2008 के विस चुनाव में उसने दो सीटें भी झटकीं। हालांकि 2013 के चुनाव में पहली बार मैदान में उतरी आम आदमी पार्टी बसपा और सपा के वोट बैंक पर सेंधमारी में कामयाब रही।
इस बार फिर से बसपा ने सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारकर और बसपा सुप्रीमो की 14 रैलियां रखकर अपने वोट बैंक को वापस लेने की कोशिश शुरू की है। पूर्वी दिल्ली में यूपी व पूर्वांचल के लोगों की काफी संख्या है, ऐसे में बसपा पूर्वी दिल्ली के अलावा मुस्लिम बहुल सीटों को सबसे ज्यादा तवज्जो देती रही है।