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Delhi NCR News: दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित वसूली के आरोप में दो वकीलों के खिलाफ जांच के आदेश दिए

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दो अवमानना याचिकाओं पर जाली हस्ताक्षर बनाने का मामला
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में कथित रूप से अदालती प्रक्रिया का दुरुपयोग कर संपत्ति मालिकों से पैसे वसूलने के आरोप में दो वकीलों के आचरण की जांच के लिए दिल्ली बार काउंसिल (बीसीडी) को निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा ने इस मामले में संज्ञान लिया। पुलिस रिपोर्ट में सामने आया कि एक व्यक्ति नरायण कुमार कश्यप का दावा है कि उनकी दो अवमानना याचिकाओं पर जाली हस्ताक्षर बनाए गए।
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कोर्ट ने कहा कि पुलिस रिपोर्ट से स्पष्ट रूप से विभिन्न व्यक्तियों के बीच गठजोड़ दिखता है, जिसमें अदालत से संपत्ति ध्वस्त करने के आदेश प्राप्त कर उनके मालिकों से पैसे वसूलने के लिए अदालती प्रक्रिया का दुरुपयोग किया जा रहा था। कश्यप ने पुलिस को बताया कि वे पहले यूनिवर्सल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन नामक एनजीओ के प्रमुख थे। उस समय कुछ वकीलों ने उनसे संपर्क कर अनधिकृत निर्माण के खिलाफ जनहित याचिका (पीआईएल) दायर करने संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए। कश्यप के अनुसार, नरेश चौहान और उनके बेटे अधिवक्ता प्रशांत चौहान ने अधिवक्ता एसके शुक्ला के माध्यम से उनसे संपर्क किया था। उन्होंने नेक नीयत से दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दिए, लेकिन बाद में दो अवमानना याचिकाओं में उनके हस्ताक्षर पाए गए, जिन्हें वे जाली बताते हैं। 21 जुलाई के आदेश में न्यायमूर्ति पुष्कर्णा ने कहा कि अदालत के सामने बहुत चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जो दिखाते हैं कि कुछ लोग अनधिकृत निर्माण वाली संपत्तियों के मालिकों से पैसे वसूलने के लिए याचिकाएं दायर कर एक घोटाला चला रहे हैं। कोर्ट ने इस कथित रैकेट से जुड़े दो वकीलों अधिवक्ता एसके शुक्ला और प्रशांत चौहान को दिल्ली बार काउंसिल को संदर्भित किया है और उनके आचरण की जांच करने का निर्देश दिया है। साथ ही पुलिस को इस मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश भी दिया गया है।
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