नई दिल्ली। दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) ने आठवीं विधानसभा की नवनिर्मित सदन समितियों के कामकाज को सुचारु और प्रभावी बनाने के लिए बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) की ओर से जारी एक औपचारिक परिपत्र में सभी प्रशासनिक सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सदन की समितियों के साथ पूर्ण सहयोग सुनिश्चित करें और आवश्यकता पड़ने पर बैठकों में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों।
सरकार ने कहा कि इस निर्देश का उद्देश्य विधायी प्रक्रिया को मजबूत करना, पारदर्शिता बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना है कि विधानसभा समितियों को नीतिगत निर्णयों और प्रशासनिक कार्यों से जुड़ी सटीक व समयबद्ध जानकारी सीधे वरिष्ठ अधिकारियों से प्राप्त हो सके। परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि समितियों को अपने विचार-विमर्श, समीक्षा और निगरानी के दौरान विभिन्न विभागों के शीर्ष अधिकारियों की विशेषज्ञ प्रस्तुतियों और स्पष्टीकरण की आवश्यकता हो सकती है।
निर्देशों के अनुसार, जब भी विधानसभा सचिवालय की ओर से बुलावा भेजा जाएगा, संबंधित प्रशासनिक सचिव को अनिवार्य रूप से समिति की बैठक में शामिल होना होगा। सरकार का मानना है कि नीति-स्तरीय चर्चाओं में विभागों के सर्वोच्च निर्णय लेने वाले अधिकारियों की उपस्थिति से न केवल चर्चा की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि जवाबदेही के मानक भी मजबूत होंगे। हालांकि, प्रशासनिक व्यस्तताओं और अपरिहार्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अनुपस्थिति की स्थिति के लिए एक स्पष्ट प्रोटोकॉल भी तय किया है। यदि कोई प्रशासनिक सचिव किसी कारणवश बैठक में उपस्थित नहीं हो पाता है, तो संबंधित विषय की पूरी जानकारी रखने वाले किसी उपयुक्त वरिष्ठ अधिकारी को प्रतिनियुक्त किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा, ताकि समिति की कार्यवाही, रिकॉर्ड प्रस्तुत करने या दस्तावेजों के परीक्षण में किसी तरह की बाधा न आए।