नफीस ने बताया कि रात के समय में कुंडली मानेसर पलवल एक्सप्रेस वे पर एक बस में मानेसर की ओर जा रही थी। इससे आग की लपटें निकल रही थी। इसे देखते ही वह तुरंत समझ गया कि बस में आग लग रही है। जबकि चालक को इसकी जानकारी नहीं है। इसके बाद नफीस ने मोटरसाइकिल पर सवार होकर बस का पीछा करना शुरू कर दिया। नफीस ने बताया कि चालक को आग लगने की जानकारी जब मिली तो वह एकाएक घबरा गया। चूंकि आधी से ज्यादा रात बीत चुकी थी। ऐसे में बस में सवार ज्यादातर श्रद्धालु सोए हुए थे। इसके बाद बस चालक ने शोर मचाकर सो रहे श्रद्धालुओं को जगाने का प्रयास किया। जैसे ही बस रुकी तो उस समय एक बुजुर्ग महिला जाग रही थी, जिसने साथी श्रद्धालुओं को जगाना शुरू कर दिया। श्रद्धालुओं ने बताया कि बस में कोई इमरजेंसी दरवाजा नहीं था। एक ही दरवाजे से निकलना एक साथ सभी के लिए मुश्किल हो गया।
बस में लगी आग और हाईवे पर चीख-पुकार सुनकर केएमपी के पास स्थित धुलावट गांव की ढाणियों से बड़ी संख्या में ग्रामीण भी घटना स्थल पर पहुंच गए। नफीस की सूझबूझ से सभी ग्रामीणों ने बस में सवार श्रद्धालुओं को निकालना के प्रयास शुरू कर दिए। ग्रामीणों ने बताया कि बस के अगले हिस्से में तेज आग लग रही थी। इसलिए यह संभव नहीं था कि बस के अगले हिस्से से श्रद्धालुओं को निकाला जाए। ग्रामीणों ने बस के पिछले हिस्से की खिड़कियों को तोड़कर श्रद्धालुओं को निकालना शुरू कर दिया।
ग्रामीणों ने बस में सवार सभी श्रद्धालुओं को बचाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन बस में सिलिंडर भी रखे हुए थे। जोकि आग लगने के कारण लीक हो गए थे और उन्होंने भी आग पकड़ ली थी। इससे ग्रामीण भयभीत हो गए। हालांकि उन्होंने बचाव कार्य जारी रखा। ग्रामीणों के मुताबिक यदि बस में सिलिंडर नहीं होते तो शायद वह सभी को आसानी से बचा सकते थे।
तालीम नामक युवक ने बताया कि जब बस को रुकवाने के लिए मोटरसाइकिल से पीछा कर रोकने के लिए आवाज लगाई जा रही थी तो बस चालक घबरा गया। सुनसान हाईवे पर बाइक सवारों को अपने पीछे तेजी से आता देख बस चालक शायद घबरा गया था। यही कारण रहा होगा कि उसने बस को रोकने की बजाय और तेजी से दौड़ाना शुरू कर दी। इसके बाद बाइक सवार युवकों ने अपनी बाइक को बस के आगे ले जाकर बस को रुकवाया।
बस में सवार श्रद्धालुओं ने बताया कि बस के केबिन व लोकरों में उनके बैग और बक्से रखे हुए थे। इनमें लाखों रुपये कीमत के सोने चांदी के आभूषण, पूजा सामग्री, खाद्य सामग्री और नकदी थी। इस आग में सब कुछ जलकर जलकर राख हो गया। हादसे के बाद कुछ श्रद्धालु अपने सामान को खोजते रहे।
हादसे में घायलों को नगर के सरकारी अस्पताल सहित निजी अस्पतालों में भी ले जाया गया। तावडू नगर के नूंह मार्ग पर स्थित एक निजी अस्पताल में पहुंचे एक घायल के परिजन हंसराज शर्मा ने कहा कि उपचार के लिए मरीज घंटे भर तक इंतजार करते रहे, लेकिन चिकित्सक नहीं पहुंचे। निजी अस्पताल संचालकों ने एंबुलेंस का बहुत ज्यादा चार्ज बताया। जबकि हादसे में उनका सामान सहित नकदी भी गायब हो गई थी।