बस के अंदर से मासूम नाना को लगाती रही आवाज
इस दौरान कुछ लोगों ने खिड़की के सहारे कूदने का प्रयास किया तो वह चोटिल हो गए। इन्हीं सब के बीच मासूम जोविता उर्फ खुशी अपने नाना राकेश से गुहार लगा रही थी...मुझे बचा लो नाना। बदहवास नाना राकेश अपनी धेवती की इस चीखों को सुनकर तड़प रहे थे। उसे बचाने के हर संभव प्रयास कर रहे थे, लेकिन मासूम बस के अंदर ऐसी जगह फंसी थी जहां आग उसे चारों ओर से घेर चुकी थी। देखते ही देखते मासूम की चीखें भी आग की लपटों के ही शांत हो गईं।
कुंडली मानेसर पलवल एक्सप्रेसवे पर इस हादसे में अपने जवान बेटे पत्नी और 10 साल की धेवती को खोने वाले राकेश शर्मा मौके पर पहुंचे पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों को फफक-फफककर रोते हुए इस हादसे की जानकारी दे रहे थे।
राकेश शर्मा का हादसे से बिखरा परिवार
राकेश ने नम आंखों से बताया कि इस हादसे में उन्होंने अपने 33 साल के जवान बेटे, पत्नी और एक मासूम धेवती को खो दिया। उन्होंने अपने सामने अपनों को दम तोड़ते देखा है। उनकी धेवती चिल्ला-चिल्ला कर बचाने की गुहार लगा रही थी, लेकिन हम बचा नहीं पाए। इस हादसे को भुलाया नहीं जा सकता। इतना कहते ही राकेश फफक पड़ते हैं। राकेश ने बताया आज उन्होंने अपनी पत्नी शशि शर्मा, बेटे गौतम शर्मा और धेवती जोविता उर्फ खुशी को खो दिया।
राकेश की बेटी सोनिया उर्फ पिंकी अपनी बेटी खुशी भाई गौतम व मम्मी शशि की मौत की सूचना पर बार बार बेसुध हो रही थी। जैसे ही उसे सुध आती तो वह इस बात को कहते हुए कि मेरी बेटी खुशी बचाओ, बचाओ की आवाज देते हुए दम तोड़ गई। मैंने अपने जवान भाई को खो दिया।मम्मी का साया भी सिर से उठ गया। वो बार बार बेसुध हो रही थी।
कई की जान बचाई, पर खुद नहीं बच पाया गौतम
मौके पर खड़े पीड़ितों ने बताया राकेश शर्मा का बेटा गौतम शर्मा सुरक्षित बस से बाहर निकल आया था। लेकिन बस के अंदर से आ रही चीख-पुकार को वह नजरअंदाज नहीं कर सका। गौतम अपनी जान जोखिम में डालकर वापस बस के अंदर चला गया। बहादुरी दिखाते हुए वह कई लोगों को बस के अंदर से सुरक्षित बाहर निकाल भी लाया, लेकिन चंद सेकेंड में आग इतनी बढ़ गई कि इसके बाद वह खुद भी नहीं निकल पाया और अंदर ही जल गया।
बहादुरी दिखाई, मगर सभी को न बचाने का है मलाल
केएमपी पर हादसे के दौरान बस में सवार लोगों में बहुत तेज चीख पुकार मची थी। बस में आग और धुएं का हाल ऐसा था कि अंदर कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। बस का एक मात्र दरवाजा और संकरा रास्ता होने के कारण घबराए लोग एक के ऊपर एक गिर रहे थे। हर कोई अपनी जान को बचाने की गुहार लगा रहा था। बस में आग की लपटों से घिरे लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे। ग्रामीण भी आग में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटे थे।
लेकिन चाह कर भी पूरी तरह मदद नहीं कर सके। इसका उन्हें बेहद मलाल है। लोगों को बचाने का प्रयास करने वाले में ज्यादातर गांव धुलावट के युवा थे। उन्होंने बताया कि जब लोग जलने लगे तो ग्रामीण भी चीख पुकार के साथ रोने लगे। पुलिस और फायर ब्रिगेड को सभी फोन करने लगे। धीरे-धीरे स्थानीय लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई। केएमपी पर भी दोनों और वाहनों की लंबी कतार लग गई। बचाव में लगे युवाओं का कहना था कि उन्होंने सभी को बचाने की कोशिश की। मदद के लिए पहुंचे युवाओं ने कहा कि मशक्कत के बावजूद कई लोग उनके सामने जिंदा आग में समा गए और वह बेबस खड़े रहे।