दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में देश की सबसे बड़ी मेडिकल रिसर्च शुरू होने जा रही है।
इसके तहत 15,000 लोगों पर एम्स और हॉलैंड की द इरॉमस यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के डॉक्टर आठ वर्षों तक ब्रेन स्ट्रोक, डिमेंशिया, हृदय रोगों और कैंसर पर शोध करेंगे। शोध में 50 साल या उससे ज्यादा की उम्र के लोगों को शामिल किया जाएगा।
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विज्ञान और तकनीक एवं भू विज्ञान मंत्री जयपाल रेड्डी और नीदरलैंड के स्वास्थ्य कल्याण और खेल मंत्री इडिथ सिफर्स की मौजूदगी में साथ मिलकर शोध करने का फैसला लिया गया। इस मौके पर एम्स के निदेशक डॉ. एमसी मिश्रा सहित दोनों देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे।
एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. कामेश्वर प्रसाद ने बताया कि आठ वर्षों तक दोनों देश मिलकर शोध करेंगे। सबसे पहले पांच विशेषज्ञों के एक दल को प्रशिक्षण के लिए नीदरलैंड भेजा जाएगा। यह दल नीदरलैंड में 25 वर्ष से चल रहे इस तरह के शोध और उसके परिणाम का अध्ययन करेंगे।
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उन्होंने बताया कि मेडिकल रिसर्च में 7,500 लोगों को दिल्ली के वसंत कुंज इलाके से और करीब 7,500 लोगों को हरियाणा के मानेसर से शामिल किया जाएगा। उनके मुताबिक स्क्रीनिंग कई हजार लोगों पर की जाएगी लेकिन अंत में 15,000 लोगों को चुना जाएगा जिन पर आठ वर्षों तक शोध होगा।
शोध में शामिल होने वाले लोगों को एम्स लाया जाएगा और उनका खून जांच के अलावा ईसीजी, ब्रेन का एमआरआई, सेरोटाइड डॉपलर, इको कार्डियोलॉजी और ब्रेन फंक्शन टेस्ट किया जाएगा। हर छह माह पर इन लोगों के स्वास्थ्य की जानकारी फोन से ली जाएगी और हर तीन वर्ष पर शोध में शामिल लोगों की शारीरिक जांच भी की जाएगी।