ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर एनसीआर में ईंट भट्ठों के संचालन पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। ईंट-भट्ठों पर पर्यावरण व खनन मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है।
भट्ठों को खनन विभाग द्वारा एनओसी जारी कर लाखों रुपये रायल्टी जमा करा ली गई है। ट्रिब्यूनल के आदेश से भट्ठा संचालकों में हड़कंप मचा है। एनसीआर में सैकड़ों ईंट भट्ठे चलते हैं।
पर्यावरण मानकों का पालन करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भट्ठा संचालकों ने ऊंची चिमनियां पहले ही बनवा ली थीं। ईंट बनाने के लिए भट्ठा संचालकों को खनन विभाग, जिला प्रशासन, जिला पंचायत, पर्यावरण विभाग, प्रदूषण विभाग और श्रम विभाग आदि ने एनओसी लेनी होती है।
प्रदेश सरकार ने पिछले दिनों सामान्य शर्तों के साथ भट्ठों को खनन की अनुमति लेने से मुक्त कर दिया था। इसके लिए उनसे एक मुश्त रायल्टी जमा कराई जा रही थी। ज्यादातर भट्ठा मालिकों ने रायल्टी के रूप में मोटी धनराशि जमा कर दी है।
अब ग्रीन ट्रिब्यूनल ने ईंट भट्ठा मालिकों द्वारा पर्यावरण सुरक्षा व प्रदूषण नियंत्रण मानकों का पालन न करने का आरोप लगाया है। पर्यावरण मानकों से खिलवाड़ करने के आरोपों के चलते एनसीआर में भट्ठों को न चलाने का आदेश जारी किया गया है। इससे भट्ठा मालिकों में हड़कंप मचा है।
हो जाएगी ईंटों की परेशानी
फिलहाल ईंट भट्ठों में कच्ची ईंट की भराई का काम चल रहा है। इसके बाद सभी में रोशनी (ईंट पकाने के लिए आग प्रज्वलित करने) की जाएगी। भट्ठों पर रोक लग जाने से ईंटों की निकासी समय पर नहीं हो सकेगी। इससे भवन निर्माण के काम में देरी हो सकती है। ईंटाें के मूल्यों में भी बढ़ोतरी होने की आशंका है। एनसीआर में निर्माण का बड़ा काम है। ऐसे में बाहर से ईंट मंगवाने पर इसके मूल्यों में भारी बढ़ोतरी हो जाएगी।
ग्रीन ट्रिब्यूनल का नोटिस समय से नहीं मिल सका था। ऐसे में भट्ठा मालिकों की ओर से अपना पक्ष नहीं रखा जा सका। इसकेचलते एक पक्षीय निर्णय हो गया है। फरवरी में पड़ने वाली तारीख पर हम अपना पक्ष रखेंगे। इसकेबाद रोक हट जाने की उम्मीद है। - ओमप्रकाश सिंह, सचिव ईंट भट्ठा एसोसिएशन