न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और शलिंदर कौर की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख मलिक की ओर से कोई भी पेश नहीं हुआ। अदालत ने सुनवाई 14 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी।
29 मई को, उच्च न्यायालय ने आतंकी फंडिंग मामले में मौत की सजा की मांग करने वाली एनआईए की याचिका पर मलिक को नोटिस जारी किया था और अगली तारीख पर उसको उपस्थिति करने का निर्देश दिया था।
इसके बाद जेल अधिकारियों ने एक आवेदन दायर कर इस आधार पर उसकी आभासी उपस्थिति की अनुमति मांगते हुए तर्क रखा कि वह एक बहुत उच्च जोखिम वाला कैदी है और सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के लिए उसे अदालत में शारीरिक रूप से पेश करना जरुरी है। अनुरोध को उच्च न्यायालय ने अनुमति दे दी थी।
निचली अदालत ने 24 मई, 2022 को मलिक को कड़े गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और आईपीसी के तहत विभिन्न अपराधों के लिए दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। मलिक ने आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए सहित अन्य आरोपों में अपना दोष स्वीकार कर लिया था।
सजा के खिलाफ अपील करते हुए, एनआईए ने इस बात पर जोर दिया है कि किसी आतंकवादी को केवल इसलिए आजीवन कारावास की सजा नहीं दी जा सकती क्योंकि उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है और मुकदमा नहीं चलाने का विकल्प चुना है।
सजा को बढ़ाकर मौत की सजा तक करने की मांग करते हुए एनआईए ने कहा है कि अगर ऐसे खूंखार आतंकवादियों को सिर्फ इसलिए मौत की सजा नहीं दी जाती क्योंकि उन्होंने अपना गुनाह कबूल कर लिया है, तो सजा नीति पूरी तरह खत्म हो जाएगी और आतंकवादियों के पास मौत की सजा से बचने का एक रास्ता बच जाएगा।
एनआईए ने कहा कि आजीवन कारावास की सजा आतंकवादियों द्वारा किए गए अपराध के अनुरूप नहीं है, जब देश और सैनिकों के परिवारों को जान का नुकसान हुआ है और ट्रायल कोर्ट का निष्कर्ष है कि मलिक के अपराध दुर्लभतम में से दुर्लभतम की श्रेणी में नहीं आते हैं। मृत्युदंड देने के मामले में पहली नजर में कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण और पूरी तरह से अस्थिर है।
एजेंसी ने इस बात पर जोर दिया है कि यह उचित संदेह से परे साबित हो चुका है कि मलिक ने घाटी में आतंकवादी गतिविधियों का नेतृत्व किया और खूंखार विदेशी आतंकवादी संगठनों की मदद से घाटी में सशस्त्र विद्रोह की साजिश रच रहा था, योजना बना रहा था, इंजीनियरिंग कर रहा था और उसे अंजाम दे रहा था भारत के एक हिस्से की संप्रभुता और अखंडता को हड़प लें।