पेश मामले में सुरेन्द्र सिंह ने 22 जनवरी 2016 को पूर्वी दिल्ली की एक संपत्ति पर अपना मालिकाना हक जताते हुए विश्वनाथ से फ्लैट खाली करवाने के लिए याचिका दायर की। अदालत ने उसके हक में फैसला दिया। इसके बाद ओझा ने इस फैसले के खिलाफ सैशन कोर्ट, हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कई बार फैसलों के पुर्ननिरीक्षण याचिका दायर की। उसकी याचिका कई बार जुर्माने के साथ खारिज हुई। इसके अलावा उसने कब्जा सौंपने की शर्त पर भी याचिका वापस ली। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान दूसरे पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष उक्त आदेश पेश करते हुए कहा कि याची अदालत को लगातार गुमराह कर रहा है।
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा दायर याचिका में इस आदेश का कोई उल्लेख नहीं है और न ही इसकी प्रति दाखिल की गई है। इस न्यायालय की राय में, इस आदेश को याचिकाकर्ता द्वारा जानबूझकर छुपाया गया है। उक्त आदेश के संदर्भ में याचिकाकर्ता ने इस न्यायालय के समक्ष दायर दूसरी अपील को वापस लेने की स्वतंत्रता के साथ वापस ले लिया। कार्यकारी न्यायालय ने विचाराधीन परिसर को खाली करने के लिए समय मांगा। हालांकि समय मांगने के लिए निष्पादन न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के बजाय याचिकाकर्ता ने ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित फैसले के खिलाफ समीक्षा याचिका दायर की।