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डायबिटीज मरीजों को टीबी से अधिक खतरा

Wed, 26 Mar 2014 03:13 PM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
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डायबिटीज रोगियों में क्षय रोग का संक्रमण अधिक घातक होता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसे एचआईवी से भी अधिक खतरनाक माना जा रहा है।
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डायबिटीज के मरीजों में क्षयरोग संक्रमण ग्लाइकेमिक कंट्रोल को बदतर बना देता है और डायबिटीज के प्रति लापरवाही से संक्रमण और बढ़ जाता है।

टीबी के मामलों में डायबिटीज मेलिटस की मौजूदगी क्षयरोग पर नियंत्रण के लिए एक नई चुनौती बनकर उभरी है। इन दोनों रोगों की मौजूदगी काफी खतरनाक है।

कोलंबिया एशिया के कंसल्टेंट पल्मनोलॉजी डा. हरनीश वोहरा ने बताया कि डायबिटीज मेलिटस के बढ़ते मामलों के लिए मोटापा भी एक रिस्क फैक्टर है।

कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले डायबिटीज मरीजों को इससे काफी खतरा होता है। क्षयरोग में पहले सामान्य संक्रमण होता है और उसके बाद संक्रमण बढ़ता जाता है जिससे रोग गंभीर रूप धारण कर लेता है।

डा. वोहरा ने बताया कि डायबिटीज पर कमजोर नियंत्रण के कारण नाड़ी संबंधी रोग, न्यूरोपैथी और कुछ अलग तरह के संक्रमणों सहित कई प्रकार की बीमारियां घर करने लगती हैं।
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इससे मल्टीपल मेकेनिज्म या माइकोबैक्टेरियम क्षयरोग से पनपने वाले रोग का खतरा भी बढ़ सकता है।

क्षयरोग के साथ ही संक्रमण से अक्सर डायबिटीज मरीजों में ग्लाइकेमिक कंट्रोल बिगड़ जाता है और डायबिटीज के लिए परहेज नहीं करने पर संक्रमण की उग्रता बढ़ सकती है।
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डब्ल्यूएचओ के अनुसार टीबी से पीड़ित सभी मरीजों को डायबिटीज की जांच होती रहनी चाहिए। डायबिटीज से पीडि़त व्यक्तियों में यदि टीबी होने का पता चलता है तो टीबी के इलाज के दौरान उनमें मौत का खतरा बहुत ज्यादा देखा गया है।

ऐसे मरीजों में दवाओं का असर बहुत धीमा होता है और धीरे-धीरे यह एमडीआर में बदल जाता है।
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