नाले में मिली थी अंकित शर्मा की लाश
ताहिर हुसैन, नजीर, आसिम, जावेद और अनास को छोड़कर इस मामले में अन्य तीन अभियुक्तों को जमानत मिल गई। हुसैन की जमानत याचिका पिछले साल सितंबर में हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थी। यह मामला दयालपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर से संबंधित है। अंकित के पिता की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी। दंगों के दौरान जब उनका बेटा लापता हो गया था, तब उन्होंने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अंकित का शव बाद में एक नाले से बरामद हुआ। इसके बाद उन्हें जीटीबी अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
क्या था मामला
वर्ष 2020 में नागरिकता संशोधन कानून के समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा के बाद 24 फरवरी, 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक झड़पें हुईं, जिसमें कम से कम 53 लोग मारे गए और कई घायल हो गए थे। इसी दौरान जब अंकित शर्मा आरोपियों को शांत करने और उनसे कानून हाथ में नहीं लेने का आग्रह कर रहे थे। तभी उन्हें पकड़ लिया गया और उनकी जान लेने के बाद शव नाले में फेंक दिया गया था।
पिता ने एफआईआर में क्या दर्ज कराया था?
शिकायतकर्ता का बेटा अंकित शर्मा, जो खुफिया ब्यूरो में अधिकारी है। वह उस दिन शाम लगभग पांच बजे किराने का सामान और घरेलू उपयोग की चीजें खरीदने के लिए घर से निकला था। हालांकि, कई घंटे बीत जाने के बाद भी वह घर नहीं लौटा। बाद में उसका शव चांद बाग पुलिया के पास एक नाले में पड़ा मिला। उसके सिर, चेहरे, छाती, पीठ और कमर पर धारदार हथियारों से गहरे घाव थे। शिकायतकर्ता ने प्राथमिकी दर्ज कराते हुए बेटे की हत्या के लिए ताहिर हुसैन और उसके साथियों को आरोपी बताया था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 51 चोटों का जिक्र
अंकित की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला था कि उनके शरीर पर धारदार हथियारों और कुंद बल के कारण 51 चोटें आई थीं। मार्च 2023 में ट्रायल कोर्ट ने ताहिर हुसैन, हसीन, नाजिम, कासिम, समीर खान, अनस, फिरोज, जावेद, गुलफाम, शोएब आलम और मुंतजिम के खिलाफ आरोप तय किए।नाजिम पर शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत भी आरोप लगाए गए थे।
समझाने से नाराज होकर दंगाइयों ने ले ली थी जान
वर्ष 2020 में नागरिकता संशोधन कानून के समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा के बाद 24 फरवरी, 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक झड़पें हुईं, जिसमें कम से कम 53 लोग मारे गए और कई घायल हो गए थे। इसी दौरान जब अंकित शर्मा आरोपियों को शांत करने और उनसे कानून हाथ में नहीं लेने का आग्रह कर रहे थे। तभी उन्हें पकड़ लिया गया और उनकी जान लेने के बाद शव नाले में फेंक दिया गया था।
कौन है ताहिर हुसैन
ताहिर हुसैन ने 2017 में आम आदमी पार्टी के टिकट पर पार्षद का चुनाव जीतकर पार्षद बना। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अमरोहा स्थित पौरारा गांव का रहने वाला है। पांच भाइयों में ताहिर सबसे बड़ा है। 2017 के चुनावी हलफनामे में उसने 18 करोड़ की घोषित संपत्ति थी। 2020 के दिल्ली दंगों में ताहिर का नाम आया। दंगों में ताहिर का नाम आने के बाद आम आदमी पार्टी ने उसे पर्टी से निष्कासित कर दिया।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने किया फैसले का स्वागत
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ताहिर हुसैन समेत पांच लोगों को अंकित शर्मा हत्याकांड में सजा मिलने पर खुशी जाहिर की। उन्होंने एक्स पर लिखा, आईबी अधिकारी स्वर्गीय अंकित शर्मा हत्याकांड में माननीय न्यायालय द्वारा आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और अन्य 5 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने का हम स्वागत करते हैं।
आज दिल्ली की जनता आम आदमी पार्टी से जवाब चाहती है। ताहिर हुसैन को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया लेकिन उसके बाद भी केजरीवाल जी, मनीष सिसोदिया उसके सपोर्ट में खड़े रहे! उसे बचाने की लगातार कोशिश करते रहे! आखिर क्यों? क्या केजरीवाल जी दिल्ली की जनता को बताएंगे? क्या उनकी शह पर ही ताहिर हुसैन जैसे लोगों ने दंगों की साजिश रची थी? आज न्याय की जीत हुई है। यह फैसला देश के हर नागरिक का कानून और न्यायपालिका पर विश्वास और मजबूत करता है।