लोगों का दावा है कि लाठी के सहारे चलने वाले बुजुर्ग, कमजोर मरीज और दिव्यांग भी आम मरीजों की तरह ही लंबी लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं। इनके लिए अलग कतार या प्राथमिकता की कोई व्यवस्था नहीं है। लोगों को दवा लेने के लिए सबसे पहले अपनी पर्ची जमा करानी होती है, जिसके बाद करीब आधे से एक घंटे बाद नाम से पुकारा जाता है।
जब तक मरीज कहीं कोना देखकर या किसी दीवार सहारे परेशान बैठा रहता है और परिजन अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहे होते हैं। वहीं, कई बुजुर्ग व दिव्यांग अकेले होते हैं, जिनके लिए कोई विशेष सुविधा नहीं होती है। यह नजारा दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों में मौजूद जन औषधि केंद्र का है। ऐसे में मरीजों व परिजनों की मांग है कि इस समस्या पर विशेष व्यवस्था की जरूरत है।