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Delhi NCR News: सुखद यादों के साथ संपन्न हुआ तफरीह महोत्सव

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नई दिल्ली। तीन दिनों तक चला तफरीह आर्ट फेस्टिवल रविवार को सम्पन्न हो गया। 12 दिसंबर को कथा और स्टोरीटेलिंग से शुरू हुई यह यात्रा मुशायरे, कविता, लोककथाओं, दास्तानगोई, संवाद और संगीत से होती हुई आगे बढ़ी। यहां विभिन्न कला विधाएं अलग-अलग मंचों पर नहीं, बल्कि एक-दूसरे में घुलती दिखीं।
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कविता ने कहानी से संवाद किया, संगीत ने विचारों को विस्तार दिया और रंगमंच एक साझा अनुभव में बदल गया। इस महोत्सव की खासियत उसका आत्मीय स्वरूप रहा। बड़े और औपचारिक मंचों से इतर, छोटे और निकटस्थ आयोजन स्थल ने कलाकार और दर्शक के बीच की दूरी मिटा दी। अंतिम दिन कविता-पाठ, साहित्यिक विमर्श और संगीत ने संवाद को और गहराया। “हिंदी पल्प और उसके पाठक” विषय पर चर्चा ने समकालीन पढ़ने की आदतों पर जमीनी बहस छेड़ी। समापन सत्र में अमर उजाला के फीचर एडिटर देव प्रकाश चौधरी और कलाकार प्रतिमा वत्स की उपस्थिति रही। इंडिया म्यूजिक कलेक्टिव के साथ लाइव जैमिंग ने आयोजन को उत्सवपूर्ण विदाई दी। सिली सोल्स फाउंडेशन की संस्थापक प्रियंका शर्मा की परिकल्पना में सजा तफरीह यह संदेश छोड़ गया कि कला का सबसे बड़ा काम शायद हमें थोड़ा धीमा करना और संवाद की जगह लौटाना है। ब्यूरो
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