यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के 21 हजार अलॉटियों के सपनों के घर पर तलवार लटकी है। प्राधिकरण क्षेत्र के 16 गांवों का भूमि अधिग्रहण रद्द करने के लिए 39 याचिकाएं इलाहाबाद हाईकोर्ट में डाली गई हैं।
याचिकाओं पर 24 फरवरी को सुनवाई होगी। इस दौरान यदि हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया तो आवासीय योजना को बड़ा धक्का लग सकता है।
यमुना प्राधिकरण द्वारा भट्टा, पारसौल, निलौनी शाहपुर, मिर्जापुर समेत 16 गांवों में वर्ष 2009-10 में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया हुई थी। वहीं, वर्ष 2009 में इन गांवों के अंतर्गत आने वाले प्राधिकरण के सेक्टर-18 व सेक्टर-20 क्षेत्र में 21 हजार भूखंडों की योजना लाई गई थी।
इन गांवों की करीब दो हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि इस आवासीय योजना के अंतर्गत ली गई थी। इन 16 गांवों में अधिग्रहण के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई हैं।
इसमें याचिकाकर्ताओं की ओर से भूमि अधिग्रहण पर ही सवाल खड़े किए गए हैं। उधर, सुनवाई में किसानों और प्राधिकरण के अलावा यमुना विकास प्राधिकरण के अलॉटियों का ग्रुप (येरवा) और जेपी इंफ्रा को अलॉटेड भूमि भी आ रही है। दोनों भी न्यायालय में अपनी बात रखने आ सकते हैं।