कस्बे में रहने वाले 65 वर्षीय रिटायर्ड सूबेदार सतपाल को क्या पता था कि वह और उनका परिवार दशहरा नहीं देख पाएंगे। रिश्तेदार ही उनके लिए काल साबित होंगे। उनके पड़ोसी बताते हैं कि सीधे व सरल स्वभाव के सूबेदार सतपाल सेना से रिटायर्ड होने के बाद अपना समय घर पर ही पशुओं की सेवा कर व्यतीत कर रहे थे।
सतपाल के दो बेटे थे। इनमें से छोटे बेटे विपिन ने गत वर्ष ही फांसी लगाकर जीवन लीला समाप्त कर ली थी। बड़ा बेटा पंकज एक दुर्घटना में दिव्यांग हो गया था। सतपाल के परिवार में काफी समय से जमीन-जायदाद के बंटवारे को लेकर विवाद चला आ रहा था। इसे लेकर कई बार उसने सीएम विंडो में भी शिकायत भी दी थी।
सोहना थाने में भी मामला दर्ज कराया चुका था।सतपाल के एक भाई कुंवरपाल कई वर्ष पहले दुश्मनों से कुपवाड़ा में लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे। अब परिवार के तीनों सदस्यों की हत्या के बाद छोटे बेटे विपिन की पत्नी गीता ही बची है। नागरिक उसी पर तीनों की हत्या कराने का आरोप लगा रहे हैं।
लोगों का कहना है कि गीता काफी समय से ही अपने मायके में रह रही है। सोहना कस्बे में तिहरे हत्याकांड को लेकर बेचैनी है। उक्त मामला लोगों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है।