ऐसे हुई सर्जरी
नई तकनीक में केवल 3 से 5 मिलीमीटर व्यास वाले विशेष उपकरणों और एक छोटे कैमरे का उपयोग से सर्जरी की गई। टीम ने बच्चे की छोटी सी छाती गुहा के भीतर सावधानीपूर्वक नेविगेट किया। सर्जरी काफी चुनौती वाली थी। इसमें मामूली गलती से रक्त वाहिकाओं को नुकसान हो सकता था। टीम ने एनेस्थेसियोलॉजिस्ट डॉ. निशांत पटेल के साथ मिलकर सफलतापूर्वक फेफड़ों के स्वस्थ हिस्से में ऑक्सीजन को पुनर्निर्देशित किया। बच्चे को स्थिर करने के बाद सर्जरी की तैयारी की गई। उसके बाद समस्याग्रस्त फेफड़े के ऊतक को एक छोटे से 10-मिलीमीटर चीरे के माध्यम से सावधानीपूर्वक हटा दिया गया।
बच्चा जल्द होगा ठीक
एम्स में बाल चिकित्सा सर्जरी विभाग के प्रोफेसर और प्रमुख डॉ. संदीप अग्रवाल ने कहा कि यह मामला सबसे छोटे और सबसे नाजुक रोगियों के लिए भी अत्याधुनिक बाल चिकित्सा शल्य चिकित्सा देखभाल प्रदान का प्रतीक है। एम्स में थोरैकोस्कोपिक सर्जरी नियमित रूप से की जाती है। गंभीर बीमारी से पीड़ित सबसे छोटे बच्चे में न्यूनतम पहुंच सर्जरी का सफल अनुप्रयोग और उत्कृष्ट रिकवरी है। सर्जरी के बाद न्यूनतम इनवेसिव बाल चिकित्सा सर्जरी में सुधार होगा। इससे कम उम्र के और सबसे कमजोर रोगियों की देखभाल बेहतर हो सकेगी।