लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन का बहुत महत्व होता है और इसी का पर्याय बन चुका राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर अक्टूबर 2017 में शांत हो गया था। अनगिनत आंदोलनों का गवाह रहा जंतर-मंतर मौन हो गया था।
जंतर-मंतर को खाली किए जाने के एनजीटी के आदेश के बाद पुलिस और स्थानीय निकाय अधिकारियों ने उन तंबुओं तथा अस्थायी ढांचों को हटा दिया गया था जिन्हें पूर्व सैन्यकर्मियों ने वन रैंक-वन पेंशन योजना लागू करने की मांग को लेकर यहां प्रदर्शन के लिए स्थापित किया था।
हालांकि जंतर मंतर के शांत होने से यहां के स्थानीय लोगों को काफी खुशी हुई थी क्योंकि प्रदर्शनों की वजह से इन लोगों को काफी परेशानी होती थी। अब जबकि इस रोक को हटा लिया गया है तो जरूर यह स्थानीय लोगों के लिए झटके से कम न होगा।