साइबर एक्सपर्ट रक्षित टंडन के अनुसार हम सभी को अपनी बात कहने की आजादी है। यदि आप किसी ट्वीट या पोस्ट के विरोध में अपनी प्रतिक्रिया सही तरीके से सभ्य भाषा और सही तथ्यों के साथ देते हैं, तो यह ट्रोलिंग नहीं है, लेकिन जब आप गलत उद्देश्य से किसी व्यक्ति विशेष की छवि बनाने या बिगाड़ने के लिए ट्रोल करते हैं और ट्रोल की भाषा एवं उसमें दिए तथ्य आपत्तिजनक हैं तो यह क्रिमिनल एक्टिविटी के दायरे में आ जाता है।
हालांकि इस पर कार्रवाई आसान नहीं है। क्योंकि ऐसी गतिविधियों के लिए फेक अकाउंट का इस्तेमाल किया जाता है। कई बार लोग, संस्थाएं या राजनीतिक पार्टियां अपनी बेहतर इमेज बनाने के लिए सोशल मीडिया मार्केटिंग कंपनियों को नियुक्त करती हैं।
साथ ही कई बार किसी की (प्रतिद्वंदी) छवि बिगाड़ने के लिए इन कंपनियां को कांट्रेक्ट दिया जाता है। यह कांट्रेक्ट कुछ हजार से लेकर लाखों या कभी कभी करोड़ तक के भी हो सकते हैं। ट्रोलिंग का सबसे ज्यादा इस्तेमाल राजनीतिक पार्टियों द्वारा और कभी कभी कॉरपोरेट इंडस्ट्री द्वारा किया जाता है।
शब्दों के चयन पर खास जोर
ट्रोल करने वाले ज्यादातर जल्दबाजी में काम करते हैं। क्योंकि उन्हें एक ही पोस्ट को कई अकाउंट या पेज पर शेयर करना होता है। ऐसे में उनके द्वारा चयन पर खास जोर दिया जाता है। संबंधित व्यक्ति या विषय से जुड़े कुछ शब्द निर्धारित कर लिए जाते हैं। जिन्हें देखते ही सोशल मीडिया पर ट्रोल का सिलसिला शुरू हो जाता है।
कंप्यूटर रोबोट का भी होता है इस्तेमाल
रक्षित टंडन के अनुसार सिर्फ व्यक्तियों के द्वारा ही नहीं तकनीक के माध्यम से भी ट्रोलिंग या साइबर बुलिंग की घटनाएं होती हैं। हालांकि इन्हें रोकने के लिए सोशल मीडिया साइट्स प्रयासरत रहती हैं। लेकिन फिर भी कंप्यूटर रोबोट से ट्रोलिंग की प्रक्रिया भारत में भी अछूती नहीं रही है।
क्षेत्रीय राजनेता भी सोशल मीडिया मार्केटिंग का कर रहे प्रयोग
आगामी 2019 चुनावों के मद्देनजर सोशल मीडिया मार्केटिंग का प्रयोग बढ़ चुका है। लोगों खासकर युवाओं के बीच सोशल मीडिया की बढ़ती लोकप्रियता के कारण कोई भी पार्टी इसे नजरअंदाज नहीं कर सकती है। ऐसे में स्थानीय राजनेताओं एवं पार्टियों द्वारा भी इस दिशा में कार्य किया जा रहा है।
मिल सकती है सजा
एसटीएफ एसपी एवं साइबर एक्सपर्ट डॉ. त्रिवेणी सिंह के अनुसार सोशल मीडिया मार्केटिंग अपराध नहीं है, लेकिन यदि इसके लिए अभद्र भाषा, धमकी या किसी भी तरह के आपत्तिजनक ट्रोल का इस्तेमाल किया जाता है, तो वह साइबर क्राइम की श्रेणी में आता है। जिसके लिए सजा का प्रावधान है। राजनीतिक पार्टियों द्वारा सोशल मीडिया मार्केटिंग का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन इसके लिए यदि कोई फेक अकाउंट बना रहा है तो उसे सजा मिल सकती है।