सरकार विहीन दिल्ली और खाली बैठे विधायकों पर सख्त टिप्पणी करते हुए मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने दिल्ली के उपराज्यपाल से कहा है कि या तो विधानसभा भंग करें या फिर चार हफ्ते के भीतर सरकार के गठन पर फैसला करें।
आम आदमी पार्टी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने पूछा कि आखिर एमएलए घर बैठकर क्या कर रहे हैं।
कोर्ट ने कहा कि सरकार चार हफ्ते के भीतर सकारात्मक सुझाव के साथ अपना जवाब दे। कोर्ट ने ये भी कहा कि इस मुद्दे को केवल आम आदमी पार्टी की याचिका की तरह न देखा जाए। इसे दिल्ली की जनता के नजरिए से देखा जाना चाहिए जिनके चुने हुए प्रतिनिधि बिना काम के ही सैलरी ले रहे हैं।
केजरीवाल ने लगाया था आरोप
सुप्रीम कोर्ट की इस फटकार के बाद एक बार फिर राजधानी में चुनाव की आहट शुरू हो गई है। सूत्रों के अनुसार दिल्ली में दिसम्बर तक चुनाव होने के आसार है।
मंगलवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि आप और भाजपा के सरकार न बनाने के फैसले से पैदा हुए गतिरोध को दूर किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि गत रविवार को जंतर-मंतर पर आयोजित आम आदमी पार्टी की रैली में अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि केंद्र की भाजपा सरकार नहीं चाहती कि दिल्ली विधानसभा को भंग किया जाए क्योंकि वो अभी यहां चुनाव नहीं चाहते।
जानिए, क्या है पूरा मामला?
पिछले साल हुए विधानसभा चुनावों में 28 सीटें जीतने वाली आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के सहयोग से दिल्ली में सरकार बनाई थी और बाद में 49 दिनों बाद सत्ता से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद से ही दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लागू है।
आम आदमी पार्टी के पूर्व संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद उपराज्यपाल से विधानसभा भंग करने की मांग की थी लेकिन उपराज्यपाल ने ऐसा नहीं किया और दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाने की संस्तुति कर दी।
उपराज्यपाल के इस फैसले से नाराज आम आदमी पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली और विधानसभा भंग करने की मांग करते हुए याचिका दायर की।
'एक अच्छे फैसले की उम्मीद '
सुप्रीम कोर्ट ने इसके पहले भी आम आदमी पार्टी की इस याचिका पर सुनवाई करते हुए भाजपा और कांग्रेस से साथ मिलकर दिल्ली में सरकार बनाने की संभावना तलाशने पर विचार करने का निर्देश दिया था।
हालांकि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने साथ मिलकर सरकार बनाने से इंकार कर दिया था।
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कोई फैसला नहीं सुनाया है लेकिन हमें एक अच्छे फैसले की उम्मीद है।