20 से 25 के मरीज अधिक
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से रीढ़ की हड्डी में परेशानी की शिकायत लेकर विभाग की ओपीडी में आ रहे मरीजों की उम्र घटकर 15 साल तक पहुंच गई है। इनकी रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर या दूसरी समस्याओं के साथ मल्टी डिस्क फेलियर डॉक्टरों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। अधिकतर मामलों में जटिल सर्जरी करनी पड़ती है जबकि पहले ऐसे मामलों में आने वाले मरीजों की उम्र 20 से 25 साल की रहती थी।
स्टेरॉयड का इस्तेमाल पैदा कर रहा समस्याएं
एम्स के आर्थोपेडिक्स विभाग के प्रोफेसर व स्पाइन सर्जन डॉ. भावुक गर्ग ने बताया कि एक साल में 50 के करीब 15 से 25 साल के किशोर-युवक रीढ़ की हड्डी में समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। इसमें सबसे बड़ी समस्या मल्टी डिस्क फेलियर है जो इनके इलाज को जटिल बना देता है। मरीजों से बातचीत के दौरान पता चलता है कि किशोर जल्द मसल्स बनाने के लिए स्टेरॉयड सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल करते हैं जो उनमें कई तरह की समस्याएं बढ़ा देता है।
इस तरह से पहुंचाता है नुकसान
स्टेरॉयड सप्लीमेंट्स (विशेष रूप से एनाबोलिक स्टेरॉयड्स और कॉर्टिकोस्टेरॉयड्स) रीढ़ की हड्डी और हड्डियों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है। इनके कारण हड्डियों की मजबूती में कमी आती है। इससे रीढ़ की हड्डी में संकुचनात्मक फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। स्टेरॉयड्स कैल्शियम के अवशोषण को घटाते हैं और हड्डी के निर्माण को धीमा करते हैं। रीढ़ की हड्डी में डिस्क डिग्रेडेशन होने की आशंका को बढ़ा देता है। इससे डिस्क स्लिप होने की आंशका रहती है। साथ ही मांसपेशियों में असंतुलन और रीढ़ पर दबाव बढ़ सकता है।
घट रही है मरीजों की उम्र
डॉक्टरों का कहना है कि एक समय पहले तक रीढ़ की हड्डी में शिकायत के साथ पहुंचने वाले मरीजों की उम्र 50 से 60 साल रहती थी। इनमें उम्र बढ़ने के साथ होने वाली परेशानी के कारण दिक्कत होती थी। वहीं समय बदलने के साथ मरीजों की उम्र घटकर 20 से 25 साल पहुंची। खानपान में बदलाव, जिम को लेकर बढ़े आकर्षण व दूसरे कारणों से अब 15 से 25 साल के मरीज भी इससे पीड़ित होकर एम्स पहुंच रहे हैं।
डॉक्टरों की सलाह
डॉक्टरों का कहना है कि बिना सलाह के स्टेरॉयड सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल नुकसानदायक होता है। यह हड्डियों और रीढ़ को नुकसान पहुंचा सकता है। पिछले कुछ साल में इसका चलन बढ़ा है, लेकिन इस्तेमाल को लेकर जागरूकता की कमी है। लोग बिना सलाह के ही इनका इस्तेमाल करते हैं जबकि व्यक्ति के शरीर और उसकी आवश्यकता के आधार पर इसका इस्तेमाल निर्भर करता है।