एक साल पहले ट्रिपल मर्डर केस के आरोप में जेल में बंद दलित परिवार को पैरवी के लिए वकील नहीं मिल रहे थे। जिला न्यायालय में कोई भी वकील उनकी पैरवी करने को तैयार नहीं था।
करीब छह महीने तक परिवार वकील ढूंढता रहा, लेकिन कोई केस लेने को राजी नहीं हुआ। तमाम जद्दोजहद के बाद गांव के ही सवर्ण बिरादरी का वकील अब उनकी पैरवी कर रहा है। इस बात का खुलासा किया है जितेंद्र के चचेरे भाई सुंदर ने।
उसने बताया कि दूसरे पक्ष का एक व्यक्ति जिला न्यायालय में प्रैक्टिस करता है। उनका इतना प्रभाव था कि कोई वकील केस लेने को तैयार नहीं हो रहा है। छह महीने तक वकील बदलते रहे। आखिर में गांव के ही सवर्ण जाति कावकील राकेश रावत केस की पैरवी करने को तैयार हुआ।