‘साहब, दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। हमें तो कोई मुआवजा राशि नहीं चाहिए। मुझे मेरे बच्चे वापस दे दो। हम अपना शरीर बेचकर उतने पैसे दे देंगे।
गांव में रहना छोड़ दूंगा। बस मेरे बच्चों को वापस ला दो’। ये कहना है अग्निकांड में घायल पीड़ित जितेंद्र का। वह मीडिया से बार-बार अपने बच्चों को वापस लाने की मांग कर रहा है।
बृहस्पतिवार की शाम जितेंद्र को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। इससे पहले उसके घर में मीडिया और नेताओं का जमावड़ा लगा रहा। जब जितेंद्र से सवाल किया गया कि सरकार की दी हुई मुआवजा राशि स्वीकार है।
उन लोगों ने मेरा वंश खत्म कर दिया
एक मिनट की चुप्पी के बाद उसने कहा कि हमें कोई मुआवजा राशि नहीं चाहिए। मुझे मेरे बच्चे दे दो और हम उतना पैसा दे देंगे। उन्होंने कहा कि दबंगों ने पूरे वंश को खत्म करने की चेतावनी दी थी।
उन लोगों ने मेरा वंश खत्म कर दिया। अब मैं गांव में नहीं रहना चाहता। हम गांव छोड़ कर चले जाएंगे। स्थानीय प्रशासन पर अब हमें विश्वास नहीं है।
मां की कोख हो गई सूनी जितेंद्र और रेखा की शादी पांच साल पहले ही पलवल जिले के हसनपुर के गांव बेलाबाता में हुई थी। तीन सगे भाइयों में जितेंद्र सबसे बड़ा है।
अभागी मां ने नहीं सोचा था उसकी कोख सूनी हो जाएगी
जितेंद्र के चचेरे भाई हुकुमचंद ने बताया कि इसके दोनों छोटे भाई पवन और सतेंद्र तिहरे हत्याकांड में जेल में हैं। अभागी मां रेखा ने सपने में भी नहीं सोचा था कि शादी के पांच साल में ही उसकी कोख सूनी हो जाएगी।
लेकिन शायद कुदरत को यही मंजूर था। परिजनों के मुताबिक, अग्निकांड की शिकार हुई रेखा को सफदरजंग अस्पताल के आईसीयू में रखा गया है।
अभी उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। परिजनों के मुताबिक डॉक्टर किसी को मिलने नहीं दे रहे हैं।