एक साल पहले ट्रिपल मर्डर केस के आरोप में जेल में बंद दलित परिवार को पैरवी के लिए वकीलों के लाले पड़ गए थे। जिला न्यायालय में कोई भी वकील उनकी पैरवी करने को तैयार नहीं था।
करीब छह महीने तक पीड़ित परिवार वकील ढूंढते रहे लेकिन कोई केस लेने को राजी नहीं हुआ। तमाम जद्दोजहद के बाद गांव के ही सवर्ण विरादरी के वकील अब उनकी पैरवी कर रहे हैं। इस बात का खुलासा किया है जितेंद्र के चचेरे भाई सुंदर ने।
उसने बताया कि आरोपी पक्ष का एक व्यक्ति जिला न्यायालय में प्रेक्टिस करता है। उनका इतना प्रभाव था कि कोई वकील केस लेने को तैयार नहीं हो रहा है। छह महीने तक वकील बदलते रहे। आखिर में गांव के ही सवर्ण जाति के राकेश रावत वकील केस कर पैरवी करने को तैयार हुए।
6 अक्तूबर 2014 को हुए ट्रिपल मर्डर में आरोपी बनाए गए जितेंद्र के परिवार के सदस्यों को जेल जाने के बाद परिवार गांव से साढ़े तीन महीने तक पलायन कर गया था।