कोरोना वायरस के कारण सुदीक्षा 14 मार्च को अमेरिका से भारत आ गई थी। तब से अपने घर पर ही थीं। 16 अगस्त को उसे वापस अमेरिका जाना था। सुदीक्षा के पिता की चाय की दुकान थी। फिलहाल परचून की दुकान है। वही परिवार का पालन पोषण कर रहे थे। सुदीक्षा की तीन बहन और दो भाई हैं। वह सबसे बड़ी थीं। सभी को उम्मीद थी कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वह घर की जिम्मेदारी संभालेगी। तीन साल की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी, लेकिन सुदीक्षा की मौत ने परिवार के सपनों को चकनाचूर कर दिया।
लड़कियों को शिक्षित करने का था सपना
सुदीक्षा एक साधारण परिवार से निकलकर शिक्षा के दम पर अमेरिका तक पहुंच गई थी। वह गांव और देश की अन्य लड़कियों को भी शिक्षित करना चाहती थी। यही कारण था कि अमेरिका से आने पर वह गांव की लड़कियों को पढ़ाती थी। परिजनों से कहती थी कि 20 साल की एक योजना बनाई है। एनजीओ बनाकर गांव और देश की लड़कियों को शिक्षित करने का काम करेगी। सुुदीक्षा का कहना था कि अगर लड़कियां शिक्षित हो जाएंगी तो देश की कई समस्याओं का समाधान हो जाएगा।