स्कूली छात्रों में पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने के लिए पुस्तकालयों में नैतिक मूल्यों से लेकर विज्ञान की पुस्तकें पढ़ने के लिए दी जाएंगी। पुस्तकालय में छात्रों के बौद्धिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।
सरकारी स्कूल के पुस्तकालयों में प्राथमिक स्तर के छात्र अब चंद्रयान-तीन से लेकर चाचा चौधरी पत्रिका पढ़ेंगे तो भारत के गांव, खेल-खेल में विज्ञान, वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई व समय का मूल्य जैसी पुस्तकों से रूबरू होंगे। निपुण भारत के लक्ष्यों और साक्षरता प्राप्त करने के लिए पुस्तकालय की पुस्तकों का उपयोग राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जा रहा है।
प्राथमिक कक्षाओं के स्कूल प्रमुख को यह सुनिश्चित करना होगा कि अगर उनके संस्थान में कोई खाली जगह है तो उस स्थान को पुस्तकालय के रूप में उपयोग किया जाए। इसका उद्देश्य बच्चों को प्रेरित और स्वतंत्र पाठक बनाना है। साथ ही, उम्र के अनुरूप सीखने के स्तर को बनाए रखने के लिए पढ़ने और लिखने के कौशल को बढ़ावा देना है। इसके अलावा छात्रों को शिक्षा और वास्तविक जीवन की स्थिति से जोड़ना है। ऐसे में प्राथमिक स्तर में राष्ट्रपति डॉ. ए पीजे अब्दुल कलाम, बुरे काम का बुरा नतीजा, दान की महिमा जैसी पुस्तकें भी छात्रों को अब पढ़ने के लिए उपलब्ध होंगी।
छठी से लेकर आठवीं कक्षा में बेटी की विनती, भाग्य है अपने हाथ, विश्व विख्यात सूक्ति कोष, नानी अम्मा की ऐनक व छात्रों में प्रकृति के संरक्षण को लेकर जागरूकता का भाव पैदा करने के लिए पृथ्वी कितनी प्यारी है जैसी पुस्तकें छात्रों को पढ़ने के लिए दी जाएंगी। इसी तरह 9वीं से 10वीं के छात्र भारत में वैक्सीन की गाथा, मेरे सपने का भारत, भारतीय संस्कृति और विज्ञान, ज्योतिबाफुले, नैतिक दर्शन और डॉ. भीमराव अंबेडकर, स्वस्थ एवं निरोगी जीवन, सिक्के के दो पहलू पर आधारित पुस्तकें छात्रों के लिए उपलब्ध होंगी।
पुस्तकों का अलग रिकॉर्ड रखना होगा
शिक्षा मंत्रालय ने परियोजना अनुमोदन बोर्ड (पीएबी) 2023-2024 के लिए समग्र शिक्षा-दिल्ली के तहत प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के स्कूलों में पुस्तकालय अनुदान गतिविधियों के रूप में 2.90 करोड़ की राशि स्वीकृत की है। इस अनुदान से प्राप्त पुस्तकें शिक्षा निदेशालय, दिल्ली नगर निगम, नई दिल्ली नगर पालिका परिषद, डीसीबी के स्कूलों में दी जाएंगी। इसमें प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल की संख्या1641 और सेकेंडरी व सीनियर सेकेंडरी की संख्या 1067 है। एक प्रधानाचार्य ने बताया कि इसमें क्लस्टर रिसोर्स सेंटर कॉर्डिनेटर स्कूलों के लाइब्रेरियन व प्रभारी शिक्षक को पुस्तकालय अनुदान के तहत प्राप्त स्तर वार पुस्तकों का एक अलग रजिस्टर में रिकॉर्ड रखना होगा।
दास्तान-ए-राम से लेकर जापानी कथाएं भी पढ़ेंगे छात्र
स्कूल के पुस्तकालयों को समृद्ध बनाने के लिए अलग-अलग विषय पर पुस्तकों की सूची दी गई है। जिसमें 11वीं-12वीं कक्षा के छात्र दास्तान-ए-राम को पढ़ेंगे। वहीं, आदिवासी अस्मिता का संकट, भारतीय नारी और मानव अधिकार, जापानी लोक कथाएं, मेरी किताब-मेरी दोस्त सरीखी जैसी पुस्तकें छात्र पढ़ सकेंगे। समग्र शिक्षा से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि स्कूलों में पुस्तकालय तो हैं, लेकिन विकसित भारत बनाने के लिए नए परिदृश्य की पुस्तकें पढ़ना महत्वपूर्ण है। ऐसे में सभी स्तर के छात्रों के अनुसार पुस्तकों की सूची बनाई है। इन पुस्तकों विशेष रूप से स्कूलों में रखा जाएगा।