नोटबंदी का असर प्रवासी लोगों पर पड़ने लगा है। वह शहर से पलायन करने का मन बना चुके हैं। अधिकांश ने अपने टिकट भी बुक करा लिए है। इसमें सर्वाधिक संख्या विद्यार्थियों या उन लोगों की है जो यहां किराए व प्रतिदिन कमाने खाने वाले वाले लोग हैं।
इनमें से अधिकांश के खाते बैंकों में नहीं हैं। जिन लोगों के खाते हैं उनके घर वाले ही उनके खातों में प्रतिमाह पैसा डालते है, लेकिन वह अब लाचार हैं। दरसअल, दूसरे के खाते में पैसा जमा करने के लिए बैंक खाता धारक का सत्यापित पत्र मांगा जा रहा है। जो यहां रहकर देना मुश्किल है। ऐसे में इन लोगों ने शहर से पलायन करने का फैसला लिया है।
शहर में करीब एक लाख से ज्यादा ऐसे लोग हैं जो उ.प्र, बिहार व अन्य राज्यों से आकर यहां गुजर बसर कर रहे हैं। शहर के विद्यार्थियों व ट्रेनिंग करने आए लोगों का है। माह के अंत में हॉस्टल की फीस जमा करनी है। हॉस्टल संचालक मानने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में घर जाकर ही पैसा लाने की बात विद्यार्थी कर रहे हैं।