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50 प्रतिशत विद्यार्थियों ने घर जाने के टिकट कराए बुक, अब नहीं बचे खाने के पैसे

Thu, 24 Nov 2016 12:21 AM IST
आशुतोष दुबे/अमर उजाला, नोएडा

सार

हेडिंग: अब नहीं बचे खाने के पैसे, वापस जाकर ही करेंगे इंतजाम
-50 प्रतिशत विद्यार्थियों ने घर जाने के टिकट कराए बुक
-परिजन खातों में नहीं डाल पा रहे पैसे
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- फोटो : लाल सिंह
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विस्तार
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नोटबंदी का असर प्रवासी लोगों पर पड़ने लगा है। वह शहर से पलायन करने का मन बना चुके हैं। अधिकांश ने अपने टिकट भी बुक करा लिए है। इसमें सर्वाधिक संख्या विद्यार्थियों या उन लोगों की है जो यहां किराए व प्रतिदिन कमाने खाने वाले वाले लोग हैं।
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इनमें से अधिकांश के खाते बैंकों में नहीं हैं। जिन लोगों के खाते हैं उनके घर वाले ही उनके खातों में प्रतिमाह पैसा डालते है, लेकिन वह अब लाचार हैं। दरसअल, दूसरे के खाते में पैसा जमा करने के लिए बैंक खाता धारक का सत्यापित पत्र मांगा जा रहा है। जो यहां रहकर देना मुश्किल है। ऐसे में इन लोगों ने शहर से पलायन करने का फैसला लिया है।

शहर में करीब एक लाख से ज्यादा ऐसे लोग हैं जो उ.प्र, बिहार व अन्य राज्यों से आकर यहां गुजर बसर कर रहे हैं। शहर के विद्यार्थियों व ट्रेनिंग करने आए लोगों का है। माह के अंत में हॉस्टल की फीस जमा करनी है। हॉस्टल संचालक मानने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में घर जाकर ही पैसा लाने की बात विद्यार्थी कर रहे हैं।
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घर जाना ही एक मात्र रास्ता बचा

- फोटो : लाल सिंह
आलम यह है कि विद्यार्थियों के खाते भी खाली हो चुके हैं। परिजन उनके खातों मे पैसा नहीं डाल पा रहे हैं। वहीं नेट बैंकिंग न होने की वजह से भी किराए पर रहने वाले लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। विद्यार्थियों ने बताया कि नोट बंद होने का फैसला सराहनीय है, लेकिन ऐसी हालत हो जाएगी। ऐसा नहीं सोचा था। लिहाजा घर जाना ही एक मात्र रास्ता बचा है। 

बैंक मे पैसे निकालने के लिए रोज लाइन में लग रहा हूं। ऐसे में पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। साथ ही पैसे भी नहीं निकल रहे।- अभिषेक दुबे, विद्यार्थी

दिन पर दिन समस्या बढ़ती जा रही है। कॉलेज आने-जाने में इतना किराया लग जाता है कि एटीएम के बाहर रोज लाइन लगानी पड़ती है।- मयंक, विद्यार्थी

रुपए न होने की वजह से दिक्कतें ज्यादा बढ़ गई हैं। इसलिए वापस घर जा रहा हूं। जिससे अगले दो माह का किराया ला सकूं।-भरत जागरिया, विद्यार्थी
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