सीबीएसई ने हाल ही में दसवीं, ग्यारवीं व बारहवीं के कुछ विषयों के पाठ्यक्रम में बदलाव किए हैं। अब इस बदलाव का विरोध होना शुरू हो गया है। स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया का कहना है कि लोकतंत्र और विविधता जैसे विषयों को पाठ्यक्रम से हटाने के फैसले का किसी भी अकादमिक आधार पर कोई मतबल नहीं है। ऐसा लगता है कि सीबीएसई अब एक संकीर्ण, पक्षपातपूर्ण और वैचारिक एजेंडे को आगे बढ़ा रहा है। यह हम सभी के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। पाठ्यपुस्तकों व पाठ्यक्रम के साथ निरतंर छेड़छाड़ सही नहीं है।
मालूम हो कि बोर्ड ने हाल ही में शैक्षणिक सत्र 2022-23 के लिए सीनियर सेकेंडरी पाठ्यक्रम जारी किया था। इस पाठ्यक्रम में बोर्ड ने कुछ बदलाव किए हैं। बोर्ड ने बारहवीं की राजनीति शास्त्र की पुस्तक से मुग्ल साम्राज्य के बखान केअध्याय में बदलाव किया है। जबकि ग्यारवीं की इतिहास की किताब से इस्लाम के विस्तार से जुड़े अध्यायों को हटा दिया है। इसके साथ ही दसवीं की सोश्ल साइंस के पाठ्यक्रम से शायर फैज अहमद फैज की नज्मों को भी हटाया है। इसके अलावा दसवीं कक्षा खाद्य सुरक्षा अध्याय से कृषि पर वैश्वीकरण का प्रभाव, बारहवीं कक्षा की राजनीति शास्त्र की पुस्तक से शीत युद्ध काल और गुटनिरपेक्ष आंदोलन का पाठ में भी बदलाव किए हैं।