रजिस्ट्री कराए बिना 21000 फ्लैटों में रहने वालों की परेशानी बढ़ गई है। रजिस्ट्री विभाग इनकी बिजली सप्लाई रुकवाने की तैयारी कर रहा है। इन पर 400 करोड़ का स्टांप फंसा है। बिल्डरों ने लेट पेनल्टी से बचने के लिए इनको पजेशन दे दिया है। खरीदारों से रजिस्ट्री का पैसा भी जमा करा लिया, मगर रजिस्ट्री नहीं करा रहे।
दरअसल, ओखला पक्षी विहार से 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले प्रोजेक्ट के फ्लैटों को कंपलीशन अगस्त 2015 के बाद मिलना शुरू हुआ। इसी माह नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने प्राधिकरण को एनजीटी से 10 किलोमीटर के दायरे वाले प्रोजेक्ट को कंपलीशन सर्टिफिकेट जारी करने की अनुमति दी थी।
तब से अब तक कुल 21 हाउसिंग प्रोजेक्ट को कंपलीशन जारी हुए। इन प्रोजेक्ट में 21869 फ्लैट हैं। एकाध को छोड़कर बाकी की रजिस्ट्री रुकी हुई है। प्राधिकरण से सात कॉमर्शियल और दो संस्थागत भूखंडों को भी कंपलीशन जारी हो चुके हैं, मगर रजिस्ट्री बहुत कम संपत्तियों की हुई।
रजिस्ट्री विभाग के अनुसार बिल्डरों ने फ्लैट पर पजेशन देने से पहले खरीदारों से रजिस्ट्री का पैसा भी जमा करा लिया। मौके पर सर्वे के दौरान विभाग को यह भी पता चला है कि कुछ बिल्डरों ने एनजीटी के फैसले से पूर्व और कुछ ने बाद में पजेशन दे दिया।
खरीदारों से पैसे भी जमा करा लिए हैं, मगर रजिस्ट्री अब तक नहीं कराई। नोएडा फेज तीन और नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर ऐसे तमाम प्रोजेक्ट हैं, जिनमें लोग बिना रजिस्ट्री के लंबे समय से रहते हैं। रजिस्ट्री विभाग डीएम से अनुमति लेकर इन सोसायटियों की बिजली कनेक्शन कटवाने की तैयारी कर रहा है।
बिल्डरों के साथ बीते दिनों बैठक में भी चेतावनी दी गई थी कि तैयार फ्लैटों की रजिस्ट्री शीघ्र करा लें, मगर बिल्डर इस पर ध्यान नहीं दे रहे। जब तक कार्रवाई नहीं होगी तब तक ये नहीं मानेंगे। डीएम से अनुमति लेकर शीघ्र ही कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस बाबत शासन से भी बात कर ली गई है।
- एसके सिंह, एआईजी स्टांप नोएडा
नोएडा ही नहीं, ग्रेटर नोएडा के बिल्डरों का भी यही हाल है। बिल्डरों ने खरीदारों से रजिस्ट्री का पैसा ले लिया है, मगर रजिस्ट्री नहीं करा रहे। खरीदार इससे परेशान हैं। ऐसी तमाम शिकायतें नेफोवा के पास भी आ रही हैं।
- अभिषेक कुमार
नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ऑनर्स वेलफेयर एसोसिएशन
प्राधिकरण 10 साल के पेमेंट प्लान पर जमीन आवंटित करता है, मगर पांच साल में प्रोजेक्ट का एक हिस्सा पूरा होने पर पार्ट कंपलीशन भी मिल जाता है, मगर जमीन की पूरी कीमत दिए बिना रजिस्ट्री शुरू नहीं हो पाती।
बिल्डर के सामने उस समय वित्तीय संकट आ जाता है। बैंकों से ज्यादा कर्ज भी नहीं मिल पा रहा। इस परेशानी को प्राधिकरण के सामने रखा गया है। उनसे पेमेंट का रीशेड्यूलमेंट करने की योजना लाने को कहा गया है। आगामी बोर्ड बैठक से कुछ निष्कर्ष निकलने का आश्वासन मिला है।
- मनोज गौड़, अध्यक्ष क्रेडाई एनसीआर