नोएडा में आयकर विभाग के छापे के बाद प्राधिकरण ने यादव सिंह को सस्पेंड तो किया जा चुका है, लेकिन जिस तरह से भाजपा ने प्राधिकरण की घेराबंदी की है, उससे अग्रिम कार्रवाई का दबाव भी बढ़ गया है।
प्रदेश सरकार किरकिरी से बचने के लिए यादव सिंह पर सख्त कार्रवाई कर सकती है। इसमें नौकरी से बर्खास्तगी तक का विकल्प खुला हुआ है। 27 नवंबर को यादव सिंह के यहां आयकर विभाग का छापा पड़ा था।
आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय और एसआईटी भी पूरे मामले में संज्ञान ले चुकी है। प्रवर्तन निदेशालय ने यादव सिंह के जुड़े सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज भी प्राधिकरण से ले लिए हैं। मामले की सीबीआई जांच के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका भी डाली जा चुकी है। हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए 20 जनवरी को प्रदेश और केंद्र सरकार समेत सभी पक्षों से जवाब भी मांगा है।
संभावना है कि कोई न कोई कदम कोर्ट में जवाब दाखिले करने से पहले प्रदेश सरकार ले सकती है। सूत्र बताते हैं कि शुक्रवार को भाजपा द्वारा प्राधिकरण के घेराव के बाद प्रदेश सरकार भी सोचने पर मजबूर हो गई है कि ऐसा कौन का दांव खेला जाए जिससे यह मुद्दा हल्का हो जाए।
5 जनवरी को फिर से भाजपा का प्रतिनिधिमंडल प्राधिकरण के अधिकारियों से मिलकर जानकारी लेगा कि यादव सिंह प्रकरण के बारे में जो सवालात चेयरमैन के साथ बैठक में किए गए थे, उसका पूरा विवरण क्या है।