- पीड़िता का आरोप है कि यह बर्बरता उसके पति ने नशे की हालत में की
- आरोपी पति ने पहले पत्नी को घर में मारा, उसके बाद उसके बाल घसीटते हुए गली में ले गया
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। तीस हजारी कोर्ट ने एक आरोपी पति को उसकी पत्नी के साथ बर्बरता करने पर दोषी करार दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हेम राज की अदालत ने आरोपी पति बिजेंद्र सिंह को अपराध के लिए दोषी ठहराया। हालांकि, दोषी ने अपने बयान में मामले में झूठा फंसाए जाने का दावा किया और बचाव में कोई सबूत पेश नहीं किया। ऐसे में न्यायाधीश हेमराज ने कहा कि आरोपी को हत्या के प्रयास के तहत दोषी नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि अदालत की राय है कि रिकॉर्ड में उपलब्ध सामग्री के आधार पर अभियुक्त को आईपीसी की 308 के तहत अपराध के लिए सुरक्षित रूप से दोषी ठहराया जा सकता है।
यह घटना 22 सितंबर, 2021 में शादीपुर में घटी थी। शिकायतकर्ता संगीता का आरोप है कि इस मामले में पीड़िता के दोषी पति ने उसके माथे पर बंधी चुन्नी से उसका गला घोंटा था। उसे बालों से घसीटते हुए गली में ले गया था। इतना ही पीड़िता के मेडिकल रिपोर्ट में उसके गर्दन और पीठ पर चोट, पैर पर लिगेचर मार्क के साथ हड्डियां टूटने का भी उल्लेख किया गया है। पीड़िता का आरोप है कि उसका पति नशे की हालत में घर आया और उससे झगड़ा करने लगा। कहा कि वह उसे मार देगा क्योंकि पीड़िता को उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत करने की आदत है। देखते ही देखते यह झगड़ा शारीरिक हमले में तब्दील हुआ, जिसके बाद इसने बर्बरता का रूप ले लिया। महिला ने खुद को घर के अंदर बंद कर पीसीआर को सूचना दी।
एमएलसी से साबित हुआ अपराध
न्यायाधीश ने कहा कि आईपीसी की धारा 308, 307 का एक छोटा अपराध है। कहा कि पीड़िता ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा है कि उसे अपनी गर्दन में तेज दर्द महसूस हुआ था। मेडिकल दस्तावेजों से साबित हुआ है कि उसकी गर्दन पर खरोंच के निशान भी थे। इस प्रकार, उसे यह जानकारी होने का श्रेय दिया जा सकता है कि गला घोंटने के उसके कृत्य से पीड़िता की मृत्यु होने की संभावना थी।