बात चौदह साल पहले की है। पता चला कि बिहार के इंजीनियर साहब हैं जिन्होंने एक बच्चे को अपने घर का बंधक नौकर बना रखा है।
चूंकि इंजीनियर साहब इलाके के प्रतिष्ठित व्यक्ति थे और लोग उनकी इज्जत करते थे इसलिए, किसी ने इस अन्याय के खिलाफ आवाज नहीं उठाई।
किसी तरह यह बात बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था बचपन बचाओ आंदोलन तक पहुंची। संस्था ने तुरंत ही इस मामले में पहल की और बच्चे को आजाद कराने की मुहिम शुरू हुई।
जल्द ही बच्चा आजाद हुआ। सुमन महतो नामक आठ साल का यह बच्चा बेहद गरीब था। आजाद होने के बाद भी उसके सामने पूरी जिंदगी पड़ी थी और उसे सहारा देने वाला कोई नहीं था।
संस्था ने न सिर्फ बच्चे को आजाद कराया बल्कि उसका भविष्य भी संवारा। आठ साल के सुमन महतो की उम्र आज 22 साल है। बेगारी के लिए मजबूर किया गया वही बच्चा आज ग्राफिक डिजायनर है।