जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड के दस्तावेजों में जहां लड़का दर्ज है और पांच अगस्त को जिस बच्चे को रेफर किया जाता है, इसकी किसी ने जांच नहीं की। वहीं, अलीगढ़ ले जाने के बाद भी अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज के स्वास्थ्य कर्मियों और चिकित्सकों द्वारा उसे लड़का समझकर उपचार किया गया। साथ ही अपने दस्तावेजों में भी लड़का दर्ज कर उपचार और बाद में डिस्चार्ज कर दिया गया।
परिजनों का कहना है कि अस्पताल से जिस बच्चे को दिया गया, वही बच्चा अलीगढ़ से वापस लाए। बच्चे की कहीं बदली भी नहीं हुई, लेकिन बुलंदशहर आकर देखने पर लड़की होने की जानकारी मिली। आरोप है कि बच्चे को रेफर करते समय एसएनसीयू वार्ड से बदला गया है।
अस्पताल प्रशासन ने शिकायत सुनने से किया इंकार
परिजनों का आरोप है कि जब लड़की होने की जानकारी मिली तो इसकी शिकायत करनी चाही। मगर अस्पताल के किसी भी स्टाफ द्वारा शिकायत सुनने से इंकार कर दिया गया। न ही एसएनसीयू वार्ड प्रभारी ने समस्या सुनी। बच्चे को बदलने में एसएनसीयू वार्ड प्रभारी और स्टाफ द्वारा लापरवाही बरती गई है। इस संबंध में एसएनसीयू वार्ड प्रभारी से वार्ता करने का प्रयास किया गया तो उनका नंबर स्विच आफ आता रहा।
मामले की जानकारी नहीं है। न ही किसी परिजन द्वारा कोई शिकायत की गई। जांच की जाएगी। साथ ही ऑपरेशन से लेकर बच्चे को भर्ती करने तक के सभी दस्तावेज को देखा जाएगा। - डॉ. ज्योत्सना, प्रभारी सीएमएस
मामले की जानकारी नहीं है। मामले की जांच कराई जाएगी। इस तरह की अब तक कोई शिकायत नहीं है। परिजनों की समस्या का समाधान किया जाएगा। - डॉ. केएन तिवारी, सीएमओ